8th Pay Commission: हर कैटेगरी के रेलकर्मियों के लिए 4 अलाउंस की मांग! वेतन आयोग का 1 साल पूरा, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?

रेलकर्मियों ने ड्यूटी में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों का हवाला देकर स्पेशल अलाउंस की मांग रखी है, जो 7वें वेतन आयोग के तरीके से बिल्कुल उलट है। साथ में जानिए 8वें वेतन आयोग के 1 साल में प्रश्नावली, मेमोरेंडम, NC-JCM की मांग और देशभर में हुई बैठकों की पूरी कहानी।

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 12:22 PM
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AIRF ने 8वें वेतन आयोग से हर कैटेगरी के रेलकर्मियों के लिए रिस्क एंड हार्डशिप, हैजर्डस ड्यूटी, हिल और ड्रेस अलाउंस मांगा है

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग से हर कैटेगरी के रेलकर्मियों के लिए रिस्क एंड हार्डशिप, हैजर्डस ड्यूटी, हिल और ड्रेस अलाउंस जैसे स्पेशल अलाउंस की मांग की है। इसके लिए फेडरेशन ने ड्यूटी के दौरान होने वाली मौतों और गंभीर चोटों का हवाला दिया है।

ये मांग 7वें वेतन आयोग के उस तरीके के ठीक उलट है, जिसमें कई भत्ते खत्म कर दिए गए थे। AIRF की ये मांग ऐसे वक्त आई है जब 8वें वेतन आयोग ने अपना 1 साल पूरा कर लिया है, लेकिन न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन बढ़ोतरी पर अंतिम सिफारिशें आना अभी बाकी है।

AIRF ने आयोग से क्या मांगा?


AIRF ने 8वें वेतन आयोग से कहा है कि हर कैटेगरी के रेलकर्मियों को रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस, हैजर्डस ड्यूटी अलाउंस, हिल अलाउंस और ड्रेस अलाउंस जैसे स्पेशल अलाउंस दिए जाएं। इसके पीछे फेडरेशन ने ड्यूटी के दौरान होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को आधार बनाया।

30 अक्टूबर 2026 को अपनी सभी सहयोगी यूनियनों को भेजे लेटर में AIRF ने लिखा, "पे कमीशन को ये भी समझाया गया कि नौकरी के दौरान रेलकर्मियों की जितनी मौतें होती हैं और जितनी गंभीर चोटें आती हैं, उन्हें देखते हुए रेलवे की हर कैटेगरी के कर्मचारियों के लिए रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस, हैजर्डस ड्यूटी अलाउंस, हिल अलाउंस और ड्रेस अलाउंस जैसे 'स्पेशल अलाउंस' पर विचार किया जाना चाहिए।"

AIRF के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा और वर्किंग प्रेसिडेंट जे.आर. भोसले ने की। ये प्रतिनिधिमंडल आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, मेंबर प्रोफेसर पुलक घोष और मेंबर-सेक्रेटरी पंकज जैन के सामने पेश हुआ। मिले हुए दो घंटों में पहले न्यूनतम वेतन और रेलवे के लिए खास अलाउंस जैसे आम मुद्दे रखे गए। फिर लोको और ट्रैफिक रनिंग स्टाफ, उसके बाद ट्रैक मेंटेनर्स और P. Way से जुड़ी कैटेगरी, और आखिर में टेक्नीशियंस की बात हुई।

फेडरेशन ने आयोग से कहा कि रेलवे बाकी किसी भी विभाग जैसा नहीं है। सेना के बाद ये देश की "दूसरी रक्षा पंक्ति" है, जिसे आपदा, युद्ध जैसे हालात और महामारी के वक्त बुलाया जाता है।

7वें वेतन आयोग का रिस्क एंड हार्डशिप मैट्रिक्स

AIRF की मांग को समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि 7वें वेतन आयोग ने इन्हीं भत्तों के साथ क्या किया था। उसका तरीका कैटेगरी दर कैटेगरी भत्ते देने का नहीं था, बल्कि इसका ठीक उल्टा था। 7वें वेतन आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट के सार के मुताबिक उसने 52 अलाउंस पूरी तरह खत्म करने की सिफारिश की थी। 36 और अलाउंस की अलग पहचान खत्म करके उन्हें दूसरे भत्तों में मिला दिया गया।

रिस्क और हार्डशिप से जुड़े भत्तों के लिए 7वें वेतन आयोग ने एक नया रिस्क एंड हार्डशिप मैट्रिक्स बनाया। यही मैट्रिक्स उसकी सिफारिशों की धुरी था। इसे एक ग्रिड की तरह समझिए। एक तरफ कम, मध्यम और ज्यादा रिस्क, दूसरी तरफ कम, मध्यम और ज्यादा हार्डशिप। इन दोनों के मेल से 9 खाने बनते हैं। सबसे ऊपर एक अलग खाना RH-Max रखा गया, जिसमें सियाचिन अलाउंस आता है और जो इस मैट्रिक्स की सबसे ऊंची सीमा है।

इस मैट्रिक्स में रेट R3H3 खाने में ₹1,000 महीने से शुरू होकर लेवल 9 और उससे ऊपर के लिए RH-Max में ₹31,500 महीने तक जाते हैं। लेवल 8 और उससे नीचे के लिए रेट कम रखे गए। जब भी DA 50% बढ़ता है, ये रेट 25% बढ़ जाते हैं। आयोग ने इसे "आज मौजूद अनगिनत भत्तों, उनकी कैटेगरी और सब-कैटेगरी को तर्कसंगत बनाने के लिए एक नया नजरिया" बताया था।

रिस्क, नाइट पेट्रोलिंग और हिल अलाउंस का क्या हुआ

इस नए ढांचे में रिस्क अलाउंस खुद ही नहीं बचा। 7वें वेतन आयोग से पहले ये उन कर्मचारियों को मिलता था, "जो खतरनाक ड्यूटी में लगे हैं या जिनके काम का समय के साथ सेहत पर बुरा असर पड़ता है।" इसका रेट ₹60 महीना था। आयोग ने इसे खत्म कर दिया। इसके साथ कमांडो अलाउंस, हैंडीकैप्ड अलाउंस, नाइट पेट्रोलिंग अलाउंस, ऑपरेशन थियेटर अलाउंस और ऑर्गनाइजेशन स्पेशल पे भी खत्म हुए। आयोग ने कहा था, "इन भत्तों के रेट बहुत मामूली हैं। आयोग ने वेतन में जो बढ़ोतरी प्रस्तावित की है, उसके बाद इन भत्तों की जरूरत नहीं रह जाती।"

इनमें से दो भत्ते AIRF की मांग वाली कैटेगरी के लिए खास मायने रखते हैं। नाइट पेट्रोलिंग अलाउंस ट्रैकमैन को "रात में पेट्रोलिंग के दौरान होने वाली मुश्किलों की भरपाई के लिए" ₹10 प्रति रात के हिसाब से मिलता था। ये भी खत्म कर दिया गया।

हिल अलाउंस का हाल भी यही रहा। स्पेशल कंपेंसेटरी (हिल एरिया) अलाउंस को ये कहकर खत्म किया गया कि "समुद्र तल से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर शायद ही कोई मुश्किल होती है।" इसकी जगह हाई एल्टीट्यूड अलाउंस का दायरा बढ़ा दिया गया।

ड्रेस अलाउंस और ट्रैक मेंटेनर्स को मिली राहत

ड्रेस अलाउंस के साथ 7वें वेतन आयोग ने अलग रास्ता चुना। यूनिफॉर्म से जुड़े सभी भत्तों को "जूतों समेत एक ही ड्रेस अलाउंस" में मिला दिया गया। ये ₹5,000 सालाना उन कर्मचारियों को मिलना तय हुआ, जिन्हें यूनिफॉर्म दी जाती है और जिन्हें इसे रोज पहनना होता है, जैसे ट्रैकमैन, भारतीय रेलवे का रनिंग स्टाफ और स्टाफ कार ड्राइवर।

ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग में एक फायदे वाली बात भी थी। आयोग ने कहा था, "इन कर्मचारियों की मुश्किलों को मानते हुए सिफारिश की जाती है कि ट्रैक मेंटेनर्स की चारों कैटेगरी को रिस्क एंड हार्डशिप मैट्रिक्स के सेल R3H2 (₹2,700 महीना) के आधार पर रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस दिया जाए।" इसके साथ स्पेशल LC गेट अलाउंस को सेल R3H3 में रखा गया और "मौजूदा रेट से सही तरीके से बढ़ाया गया।"

असली टकराव रिस्क पर नहीं, तरीके पर है

यानी AIRF और 7वें वेतन आयोग के बीच की दूरी इस बात पर नहीं है कि रेलकर्मियों को खतरा है या नहीं। 7वें वेतन आयोग ने ट्रैक मेंटेनर्स के मामले में ये खतरा माना था और उसकी कीमत R3H2 पर तय की थी। असली फर्क इस बात का है कि ये पैसा किस रास्ते से दिया जाए।

AIRF अब हर कैटेगरी के लिए एक बड़ा स्पेशल अलाउंस मांग रहा है। साथ में हैजर्डस ड्यूटी अलाउंस भी, जो 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट में है ही नहीं। 7वें वेतन आयोग का जवाब था मैट्रिक्स, जिसमें कोई भी नया भत्ता "रिस्क और हार्डशिप कितनी गंभीर है, उसके हिसाब से सही खाने में रखा जा सकता है।"

अब 8वें वेतन आयोग के सामने एक ऐसा फैसला है, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। या तो मैट्रिक्स को बड़ा करके उसके खानों के रेट फिर से तय किए जाएं, या फिर सबके लिए एक नया अलाउंस बनाया जाए। AIRF ने अपनी पसंद और उसके पीछे की दलील, दोनों अब रिकॉर्ड पर रख दी हैं।

8वें वेतन आयोग का 1 साल, कहां तक पहुंचा काम

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बना 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अपना 1 साल पूरा कर चुका है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। उसी दिन सरकार ने आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) नोटिफाई किए, जिनमें आयोग के काम का दायरा, जिम्मेदारियां, टाइमलाइन, मुख्य काम और तीनों मेंबर्स के नाम दिए गए।

ये आयोग 3 मेंबर्स का है। चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं, प्रोफेसर पुलक घोष पार्ट-टाइम मेंबर हैं और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी हैं। सरकार ने आयोग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने दिए हैं, यानी ये डेडलाइन 3 मई 2027 को पूरी होगी। आयोग का मुख्य काम केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, अलाउंस और नौकरी की दूसरी शर्तों में बदलाव की सिफारिश करना है।

पिछले 1 साल में आयोग ने अपना शुरुआती ढांचा तैयार किया, ऑनलाइन प्रश्नावली जारी की, अलग-अलग शहरों में कर्मचारी यूनियनों से बैठकें कीं और सुझाव मांगे। देशभर में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के सैकड़ों संगठनों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से बात हुई है। इन्हीं सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। कैबिनेट से रिपोर्ट की मंजूरी और वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के बाद ही कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर नई सैलरी और पेंशन लागू होगी।

18 सवालों की प्रश्नावली और मेमोरेंडम की खिड़की

आयोग को रफ्तार पकड़ने में थोड़ा वक्त लगा। पहला बड़ा कदम 5 फरवरी 2026 को आया, जब 18 सवालों वाली प्रश्नावली जारी हुई। इसे सरकारी विभागों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, एसोसिएशंस, रिसर्चर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को भेजा गया। इसके जरिए वेतन, पेंशन और काम की शर्तों जैसे कई मुद्दों पर राय दी जा सकती थी। प्रश्नावली जमा करने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2026 थी।

5 मार्च 2026 से आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की खिड़की भी खोली। नौकरी कर रहे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, यूनियनों, एसोसिएशंस और संगठनों से कहा गया कि वे 8वें वेतन आयोग से अपनी उम्मीदों पर पूरी रिपोर्ट भेजें। ये मेमोरेंडम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और MyGov पोर्टल पर जमा होने थे। पहले आखिरी तारीख 30 अप्रैल थी, जिसे ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय लेने के लिए पहले 31 मई और फिर 15 जून तक बढ़ाया गया।

NC-JCM की मांग, ₹69,000 न्यूनतम वेतन और 3.833 फिटमेंट फैक्टर

अप्रैल की शुरुआत में नेशनल काउंसिल (जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) यानी NC-JCM (स्टाफ साइड) ने अपना मेमोरेंडम जमा किया। इसमें ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे और 3.833 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की गई। कर्मचारियों की नजर सबसे ज्यादा इन्हीं दो आंकड़ों पर है।

NC-JCM की दूसरी बड़ी मांगें भी कम अहम नहीं हैं। आखिरी बेसिक पे का 67% न्यूनतम पेंशन, हर साल 6% इंक्रीमेंट, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के रेट में बदलाव और DA के 25% पहुंचते ही उसे बेसिक पे में मिलाने की मांग भी इस मेमोरेंडम में शामिल है।

देहरादून से मुंबई तक, देशभर में हुई बैठकें

8वें वेतन आयोग की सबसे अहम प्रक्रियाओं में से एक, स्टेकहोल्डर्स से बातचीत, अप्रैल 2026 में शुरू हुई। इन बैठकों में स्टेकहोल्डर्स ने कर्मचारियों से जुड़ी मांगों के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी बात रखी। अब तक कहां-कहां बैठकें हुईं और उनका ऐलान कब हुआ, यहां देखिए। ये सभी तारीखें 2026 की हैं।

  • देहरादून: 24 अप्रैल को बैठक, ऐलान 30 मार्च को
  • पुणे: 4-5 मई को बैठक, ऐलान 11 अप्रैल को
  • दिल्ली: 10 मई को बैठक, ऐलान 6 मई को
  • हैदराबाद: 18-19 मई को बैठक, ऐलान 1 मई को
  • श्रीनगर: 1-4 जून को बैठक, ऐलान 1 मई को
  • लद्दाख: 8 जून को बैठक, ऐलान 1 मई को
  • लखनऊ: 22-23 जून को बैठक, ऐलान 21 मई को
  • भुवनेश्वर: 6-7 जुलाई को बैठक, ऐलान 26 मई को
  • कोलकाता: 9-10 जुलाई को बैठक, ऐलान 29 मई को
  • दिल्ली (दूसरी बैठक): 7 अगस्त को बैठक, ऐलान 23 जुलाई को
  • जयपुर: 31 अगस्त से 1 सितंबर तक बैठक, ऐलान 3 अगस्त को
  • चेन्नई: 7-8 सितंबर को बैठक, ऐलान 24 जुलाई को
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर को बैठक, ऐलान 7 जुलाई को
  • चंडीगढ़: 16-18 सितंबर को बैठक, ऐलान 28 जुलाई को
  • बेंगलुरु: 7-8 अक्टूबर को बैठक, ऐलान 24 अगस्त को
  • मुंबई: 22-23 अक्टूबर को बैठक, ऐलान 21 सितंबर को

मुंबई की बैठक अब तक की आखिरी बैठक है। आने वाले दिनों में आयोग कुछ और बैठकों की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

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