8th Pay Commission Pay Scale Merger: 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और बैठकें बेहद तेज हो गई हैं। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन वृद्धि, भत्तों और सैलरी स्ट्रक्चर पर अपनी सिफारिशें तैयार कर रहा है।
इस बीच केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठनों में से एक 'नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी' (NC-JCM) ने वेतन आयोग के सामने एक बेहद चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा है। NC-JCM ने मांग की है कि मौजूदा पे-मैट्रिक्स के कई कर्मचारी स्तरों को आपस में मर्ज कर दिया जाए। आइए समझते हैं कि इस पे-स्केल मर्जर प्रस्ताव का क्या मतलब है, इसके पीछे क्या दलील दी गई है और कर्मचारियों की अन्य बड़ी मांगें क्या हैं।
क्यों हो रही है पे-स्केल मर्ज करने की मांग?
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 18 अलग-अलग पे-लेवल में बांटा गया है। NC-JCM ने इस पे-मैट्रिक्स को सरल और अधिक न्यायसंगत बनाने के लिए कई लेवल्स को आपस में मिलाने का प्रस्ताव दिया है:
इन लेवल्स को मर्ज करने का प्रस्ताव:
कर्मचारी संगठन का कहना है कि इन लेवल्स के कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी में बहुत मामूली अंतर होता है और वे लगभग एक जैसे काम संभालते हैं। लेकिन अलग-अलग रैंक होने के कारण कर्मचारियों के बीच लंबे समय तक असंतोष और हीनभावना पैदा होती है। इसे मर्ज करने से यह भेदभाव खत्म होगा।
लेवल 5 के कर्मचारियों के लिए विशेष 'अपग्रेड' की मांग
NC-JCM ने एक विशेष प्रावधान के तहत मांग की है कि मौजूदा लेवल 5 के कर्मचारियों को वन-टाइम अपग्रेड देकर सीधे लेवल 6 में मर्ज किया जाए। संगठन ने नोट किया कि सेंट्रल सेक्रेटेरियट, डिफेंस, पोस्टल और रेलवे विभाग के ग्रुप-सी कर्मचारी सालों से लेवल 5 पर ही अटके हुए हैं। इस अपग्रेड से कर्मचारियों के करियर में आ रही स्थिरता और ठहराव की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।
मिनिमम बेसिक पे ₹69,000 करने समेत NC-JCM की अन्य बड़ी मांगें
पे-स्केल मर्जर के अलावा कर्मचारी संगठन ने सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलावों की वकालत की है:
डाटा कलेक्शन जारी, राज्यों के दौरे पर है 8th CPC
8वें वेतन आयोग के कामकाज की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। आयोग ने सुझाव देने के लिए 15 जून की डेडलाइन तय की थी, जबकि वित्तीय और प्रशासनिक डाटा जमा करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है। मार्च 2026 से ही वेतन आयोग की टीम विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दौरे पर है ताकि कर्मचारी यूनियनों, संगठनों और रेलवे व डिफेंस के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी जमीनी मांगों को समझा जा सके।
कब तक आएंगी अंतिम सिफारिशें और कब बढ़ेगी सैलरी?
3 नवंबर 2025 को गठित हुए इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है। इस लिहाज से आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें फरवरी या अप्रैल 2027 तक सौंप सकता है।
पिछले पे-कमीशन के ट्रेंड को देखें तो आयोग की सिफारिशें आने के बाद भी उसे जमीन पर पूरी तरह लागू करने में सरकार को 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन वृद्धि का पूरा लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक ही मिल पाएगा।