पैसे का दबाव बढ़ने पर कई बार पुरानी EMI चुकाने के लिए नया लोन लेना आसान लगता है। लेकिन, ऐसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, यह ट्रेंड बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार इनकम से ज्यादा खर्च आपको लोन लेने के लिए मजबूर करता है। लोन का अमाउंट अगर आपके चुकाने की क्षमता से ज्यादा हो जाता है तो यह डेट ट्रैप बन जाता है।
डेट ट्रैप में फंसने का खतरा
डेट ट्रैप का मतलब ऐसी स्थिति से है, जब व्यक्ति चाहकर भी कर्ज के जाल से बाहर नहीं निकल पाता है। कई बार तो क्रेडिट कार्ड के ज्यादा इस्तेमाल से भी व्यक्ति डेट ट्रैप में फंस जाता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को इस महीने EMI का पेमेंट करना है।
एक की जगह दो EMI का पेंमेंट
बैंक सेविंग्स अकाउंट में पर्याप्त पैसे नहीं होने पर वह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है या नया लोन लेता है। इससे वह इस महीने के ईएमआई का तो पेमेंट कर देता है, लेकिन उसने जो लोन लिया है, उसकी EMI का पेमेंट भी उसे अगले महीने करना होगा। इसका मतलब है कि आगे उसे हर महीने एक EMI की जगह दो ईएमआई चुकानी होगी।
जरूरी खर्च के लिए कम बचते हैं पैसे
कर्ज का बढ़ता बोझ व्यक्ति को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। ज्यादा ईएमआई चुकाने से उसके हाथ में हर महीने खर्च के लिए कम पैसे बचते हैं। इसका सीधा असर परिवार के जरूरी खर्चों पर पड़ता है। साथ ही इससे परिवार की सेविंग्स और इनवेस्टमेंट पर भी असर पड़ता है। यह भविष्य में आने वाले जरूरतों जैसे बच्चे की पढ़ाई, घूमने के प्लान आदि पर असर डालता है।
डिफॉल्ट का खतरा भी बढ़ता है
EMI के बढ़ते बोझ से डिफॉल्ट का भी खतरा बढ़ जाता है। डिफॉल्ट से व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर खराब होता है। क्रेडिट स्कोर ज्यादा खराब होने पर भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको यह पता होना चाहिए कि आप मैक्सिमम कितने अमाउंट के लोन का बोझ उठा सकते हैं। इससे आप अपनी रीपेमेंट क्षमता से ज्यादा अमाउंट का लोन लेने से बच जाएंगे। इससे आपके डेट ट्रैप में फंसने का डर नहीं नहीं होगा।