8th Pay Commission: केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) लागू होने वाला है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जनवरी 2025 को 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दी। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ पेंशनर्स की पेंशन में भी बदलाव होना तय है। केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। हालांकि पे पैनल को अपनी रिपोर्ट पेश करने और उसके बाद उसे मंजूरी मिलने में एक साल लग सकता है।
क्या 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें मोदी सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ाएंगी? यह सवाल लोकसभा सांसद कंगना रनौत और सजदा अहमद ने उठाया है। उन्होंने इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही 7वें CPC स्तर पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की अनुमानित संख्या के बारे में भी जानना चाहा, जिन्हें 8वें CPC से फायदा मिलने की संभावना है। सांसदों ने यह भी जानकारी मांगी कि क्या सरकार ने राजकोषीय नीतियों और सरकारी खर्च पर 8वें CPC के असर का आकलन करने के लिए कोई स्टडी की है या कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और अन्य स्टेकाहोल्डर्स के साथ परामर्श किया है।
क्या रहा वित्त मंत्री का जवाब
दोनों सांसदों को जवाब देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "केंद्र सरकार के सिविलियन कर्मचारियों की अनुमानित संख्या 1 मार्च 2025 तक 36.57 लाख और पेंशनर्स/फैमिली पेंशनर्स की अनुमानित संख्या 31 दिसंबर 2024 तक 33.91 लाख है। रक्षा कर्मियों और पेंशनर्स को भी फायदा होगा। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के वित्तीय असर का पता तब चलेगा, जब 8वें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशें की जाएंगी और सरकार द्वारा स्वीकार की जाएंगी। रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग और राज्यों सहित प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर इनपुट मांगे गए हैं। 8वें CPC के असर का आकलन तभी किया जा सकता है, जब 8वें CPC की ओर से सिफारिशें की जाएंगी और सरकार द्वारा स्वीकार की जाएंगी।
2026 में खत्म होगा 7वां वेतन आयोग
7वें वेतन आयोग का गठन 2014 में किया गया था और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू हुई थीं। इसकी अवधि 2026 में खत्म हो रही है। आमतौर पर हर 10 साल में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन में बदलाव करने के लिए वेतन आयोग का गठन करती है। राज्य सरकारें भी केंद्रीय वेतन आयोग की तर्ज पर अपने कर्मचारियों के वेतन में बदलाव करती हैं।