एडवांस टैक्स की डेडलाइन नजदीक, 15 दिसंबर तक भुगतान न किया तो लगेगा जुर्माना

15 दिसंबर 2025 तक एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करना अनिवार्य है। देरी करने पर धारा 234B और 234C के तहत 1% मासिक ब्याज और जुर्माना लगेगा।

अपडेटेड Dec 07, 2025 पर 8:47 PM
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भारत में टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम अलर्ट जारी हुआ है। एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की अंतिम तारीख 15 दिसंबर 2025 है। जिन लोगों की सालाना टैक्स देनदारी ₹10,000 से अधिक है, उन्हें एडवांस टैक्स भरना अनिवार्य है। यदि इस तारीख तक भुगतान नहीं किया गया तो आयकर विभाग की धारा 234B और 234C के तहत ब्याज और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

एडवांस टैक्स क्या है?

एडवांस टैक्स वह टैक्स है जिसे आयकरदाता पूरे वित्त वर्ष में किस्तों में जमा करते हैं। इसका उद्देश्य सरकार को समय पर राजस्व उपलब्ध कराना और टैक्सपेयर्स को एकमुश्त बोझ से बचाना है।

किन्हें देना है एडवांस टैक्स?


सैलरी पाने वाले लोगों के लिए आमतौर पर यह लागू नहीं होता क्योंकि उनकी आय पर पहले से TDS कटता है। लेकिन यदि सैलरी के अलावा ब्याज, किराया, कैपिटल गेन या बिज़नेस इनकम है तो एडवांस टैक्स देना ज़रूरी है। इसी तरह फ्रीलांसर, प्रोफेशनल्स और बिजनेस ओनर्स भी इसके दायरे में आते हैं। जिनकी कुल टैक्स देनदारी ₹10,000 से अधिक है, उन्हें यह टैक्स भरना अनिवार्य है।

भुगतान की तारीखें

एडवांस टैक्स भुगतान की तारीखें तय हैं। 15 जून तक कुल टैक्स देनदारी का कम से कम 15% जमा करना होता है। 15 सितंबर तक यह अनुपात 45% तक बढ़ जाता है। 15 दिसंबर तक 75% टैक्स जमा करना अनिवार्य है और 15 मार्च तक पूरे साल का 100% टैक्स भरना होता है।

लेट होने पर क्या होगा?

समय पर एडवांस टैक्स न देने पर धारा 234B और 234C के तहत ब्याज देना होगा। ब्याज की दर 1% प्रति माह है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी की टैक्स देनदारी ₹1 लाख है और उसने 15 दिसंबर तक ₹75,000 जमा नहीं किया, तो बाकी रकम पर ब्याज देना होगा।

भुगतान की प्रक्रिया

भुगतान की प्रक्रिया भी सरल है। आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से भुगतान किया जा सकता है। इसके लिए ‘Challan 280’ भरना होता है और भुगतान के बाद रसीद सुरक्षित रखना ज़रूरी है।

15 दिसंबर की डेडलाइन बेहद अहम है। जिनकी टैक्स देनदारी ₹10,000 से अधिक है, उन्हें एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त समय पर भरनी चाहिए। देर करने पर न सिर्फ ब्याज बल्कि आगे चलकर टैक्स रिटर्न दाखिल करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे समय पर भुगतान करें और जुर्माने से बचें।

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