टैक्स रीजीम बदलने का कर रहे हैं प्लान? तो इन बातों का रखें ध्यान, वरना ज्यादा कट जाएगा टैक्स

ITR Filing 2026: 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स फ्रेमवर्क लागू होने के बाद कई नौकरीपेशा लोग यह सोचकर परेशान हैं कि अब उनकी सैलरी पर ज्यादा टैक्स कटेगा या राहत मिलेगी। सोशल मीडिया और चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा था कि सरकार ने टैक्स स्लैब बदल दिए हैं

अपडेटेड May 07, 2026 पर 4:01 PM
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ITR Filing 2026: 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स फ्रेमवर्क लागू होने के बाद कई नौकरीपेशा लोग यह सोचकर परेशान हैं कि अब उनकी सैलरी पर ज्यादा टैक्स कटेगा या राहत मिलेगी।

ITR Filing 2026: 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स फ्रेमवर्क लागू होने के बाद कई नौकरीपेशा लोग यह सोचकर परेशान हैं कि अब उनकी सैलरी पर ज्यादा टैक्स कटेगा या राहत मिलेगी। सोशल मीडिया और चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा था कि सरकार ने टैक्स स्लैब बदल दिए हैं। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल पुराने और नए दोनों टैक्स सिस्टम के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दरअसल, निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में टैक्स स्लैब को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की थी। बाद में लागू हुए इनकम टैक्स एक्ट 2025 और इनकम टैक्स रूल्स 2026 में भी यही साफ हुआ कि टैक्स दरें पहले जैसी ही रहेंगी।

पुराने टैक्स सिस्टम में क्या रहेगा?

2.5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री रहेगी

2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक 5% टैक्स


5 लाख से 10 लाख रुपये तक 20% टैक्स

10 लाख रुपये से ऊपर 30% टैक्स

इस सिस्टम में टैक्सपेयर्स को HRA, 80C, होम लोन और दूसरी कई छूटों का फायदा मिलता है।

नए टैक्स सिस्टम में क्या है?

4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री रहेगी

4 लाख से 8 लाख रुपये तक 5% टैक्स

इसके बाद आय बढ़ने के साथ टैक्स दर 10% से 30% तक जाती है

साथ ही नौकरीपेशा लोगों को 75,000 रुपये का standard deduction भी मिलता है।

नया टैक्स सिस्टम में अब भी डिफॉल्ट

सरकार ने नए टैक्स सिस्टम को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाए रखा है। यानी अगर कोई टैक्सपेयर्स अलग से पुराना सिस्टम नहीं चुनता, तो उसका टैक्स अपने-आप नए सिस्टम के हिसाब से माना जाएगा। सरकार का कहना है कि नया सिस्टम आसान और कम टैक्स दर वाला है, लेकिन इसमें ज्यादातर deductions और exemptions नहीं मिलते।

आखिर किसे कौन-सा सिस्टम चुनना चाहिए?

यहीं सबसे बड़ा कन्फ्यूजन शुरू होता है। पहली नजर में नया टैक्स सिस्टम आसान और फायदेमंद लग सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास ज्यादा निवेश या टैक्स बचाने वाले खर्च नहीं हैं।

लेकिन जिन लोगों के पास:

HRA

होम लोन

80C निवेश

मेडिकल इंश्योरेंस

अन्य allowances

जैसी सुविधाएं हैं, उनके लिए पुराना टैक्स सिस्टम अब भी ज्यादा बचत करा सकता है।

टैक्सपेयर्स क्या करें?

सिर्फ कम टैक्स रेट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। अपनी सैलरी स्ट्रक्चर, निवेश और मिलने वाली छूटों को देखकर दोनों सिस्टम की तुलना करना जरूरी है। कई मामलों में 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोग भी सही प्लानिंग के जरिए कम टैक्स दे सकते हैं। इसलिए ITR भरने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-सा टैक्स सिस्टम आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

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