Bank FD vs NSC: बैंक FD या पोस्ट ऑफिस NSC में ₹5 लाख लगाने पर 5 साल में कहां मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न? जानिए
Bank FD vs Post Office NSC: ₹5 लाख की एकमुश्त राशि निवेश के लिए बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की NSC सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 5 साल के लिए इनमें से एक विकल्प में पैसे लगाने पर आपको करीब ₹50,000 का सीधा एक्स्ट्रा फायदा हो सकता है? जानें टैक्स छूट, टीडीएस नियमों और आधिकारिक ब्याज दरों के गणित से कौन सा ऑप्शन आपके पैसे को तेजी से बढ़ाएगा
NSC में पुरानी कर प्रणाली के तहत निवेश किए गए ₹1.5 लाख तक पर 80C की छूट मिलती है
Bank FD vs Post Office NSC: अगर आपके पास ₹5 लाख की एकमुश्त राशि है और आप इसे पूरी सुरक्षा के साथ 5 साल के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपके पास दो सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं- पहला बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और दूसरा पोस्ट ऑफिस की राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC)।
अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के आधिकारिक ब्याज दरों और वित्त मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, आइए आपको बताते हैं इनकी पूरी डिटेल्स।
ब्याज दर और रिटर्न की तुलना
राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC)
ब्याज दर: 7.70% प्रति वर्ष (वार्षिक चक्रवृद्धि)।
अवधि: 5 साल (फिक्स्ड लॉक-इन)।
₹5 लाख पर मैच्योरिटी रकम: 5 साल बाद आपको लगभग ₹7,24,517 मिलेंगे। (कुल ब्याज: ~₹2,24,517)
बैंक FD
ब्याज दर: सामान्य नागरिकों के लिए 6.05% प्रति वर्ष (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.05%)।
अवधि: 5 साल।
₹5 लाख पर मैच्योरिटी रकम (सामान्य नागरिक): 5 साल बाद लगभग ₹6,75,000 मिलेंगे। (कुल ब्याज: ~₹1,75,000)
सीधा फायदा: 5 साल में NSC में निवेश करने पर सामान्य नागरिकों को बैंक FD (SBI) की तुलना में लगभग ₹49,500 का सीधा एक्स्ट्रा मुनाफा मिलेगा।
टैक्स छूट और नियम
NSC: पुरानी कर प्रणाली के तहत निवेश किए गए ₹1.5 लाख तक पर 80C की छूट मिलती है। खास बात यह है कि NSC में हर साल मिलने वाला ब्याज (अंतिम साल को छोड़कर) अपने आप री-इन्वेस्ट माना जाता है, जिस पर दोबारा 80C के तहत छूट का दावा किया जा सकता है।
5-Yr Tax Saving FD: इसमें भी केवल शुरुआती ₹1.5 लाख के मूलधन पर 80C की छूट मिलती है, लेकिन इस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य होता है।
टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (TDS)
NSC: मैच्योरिटी पर कोई TDS नहीं कटता। वैसे कुल ब्याज को टैक्स रिटर्न भरते समय इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में दिखाना होता है।
Bank FD: अगर एक साल में FD से मिलने वाला ब्याज ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक है, तो बैंक नियमानुसार 10% TDS काटता है।
लिक्विडिटी और प्री-मैच्योर विड्रॉल (समय से पहले निकासी)
NSC: इसमें 5 साल का कड़ा लॉक-इन पीरियड होता है। केवल विशेष परिस्थितियों में (जैसे- खाताधारक की मृत्यु या अदालत के आदेश पर) ही इसे समय से पहले बंद किया जा सकता है।
Bank FD: 5-साल की टैक्स सेविंग FD को समय से पहले नहीं तोड़ा जा सकता। सामान्य FD पर पेनाल्टी देकर निकासी की अनुमति होती है।
आपके लिए क्या है बेहतर?
सामान्य नागरिकों के लिए: NSC स्पष्ट रूप से बेहतर विकल्प है, क्योंकि इसमें 7.70% की ऊंची ब्याज दर, चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ और बिना TDS के ज्यादा मैच्योरिटी रकम मिलती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए: अगर वरिष्ठ नागरिक बैंक FD में निवेश करते हैं (उदा. 7.05% से 7.50% तक दरें), तो अंतर काफी कम हो जाता है, साथ ही बैंक FD में मासिक या तिमाही ब्याज निकासी का विकल्प भी मिल जाता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।