अनसिक्योर्ड लोन पर RBI की सख्ती पर दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों ने क्या कहा, NBFCs पर क्या होगा असर

RBI के फैसले पर CLSA का कहना है कि आरबीआई का फैसला अनसिक्योर्ड लोन बांटने की रफ्तार घटाने की कोशिश माना जा रहा है। बैंकों के टियर I कैपिटल में इस फैसले के चलते 0.4 से 0.8% की कमी नजर आ सकती है। वहीं Bajaj Finance के टियर I कैपिटल में 2.3% की कमी आने की आशंका है

अपडेटेड Nov 17, 2023 पर 2:51 PM
RBI के फैसले पर मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि इससे कंज्यूमर क्रेडिट पर असर पड़ेगा। फंड लागत बढ़ने से LTFH, MMFS का EPS घट सकता है
     
     
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    RBI का अनसिक्योर्ड लोन पर बड़ा फैसला आया है। अनसिक्योर्ड लोन बांटने पर आरबीआई ने लगाम लगाई है। RBI ने रिस्क वेटेज 100 से बढ़ाकर 125 परसेंट कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कंज्यूमर लोन पर क्रेडिट रिस्क वेटेज बढ़ा दिया है। ये नियम बैंक और NBFCs दोनों पर लागू होंगे। यहां तक कि पुराने और नए दोनों लोन पर भी ये नियम लागू होंगे। पर्सनल लोन पर पहले रिस्क वेटेज 100% था जिसे बढ़ाकर 125% कर दिया गया है। जबकि क्रेडिट कार्ड पर पहले रिस्क वेटेज 125% था जिसे बढ़ाकर 150% कर दिया गया है। NBFCs लोन पर पहले रिस्क वेटेज 100% था जिसे बढ़ाकर 125% कर दिया गया है। आरबीआई के सख्त रवैय पर दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज ने अपनी राय दी है-

    RBI के फैसले पर CLSA

    इस फैसले पर ब्रोकरेजेज की क्या राय बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के यतिन मोता ने कहा कि सीएलएसए का कहना है कि आरबीआई का फैसला अनसिक्योर्ड लोन बांटने की रफ्तार घटाने की कोशिश माना जा रहा है। इससे बैंकों के टियर I कैपिटल में 0.4 से 0.8% की कमी नजर आ सकती है। सीएलएसए के मुताबिक Bajaj Finance के टियर I कैपिटल में 2.3% की कमी आने की आशंका है। जबकि SBI Card के टियर I कैपिटल में 4.15% की कमी दिख सकती है।

    RBI के फैसले पर मॉर्गन स्टैनली


    मॉर्गन स्टैनली ने RBI के फैसले पर कहा कि इससे कंज्यूमर क्रेडिट पर असर पड़ेगा। बैंकों की फंडिंग के लिए कर्ज में बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी तरफ फंड लागत बढ़ने से LTFH, MMFS का EPS घट सकता है।

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    RBI के फैसले पर मैक्वायरी

    यतिन मोता ने कहा कि RBI के फैसले पर मैक्वायरी का कहना है कि इससे PSU बैंक के CET1 रेश्यो में गिरावट आना ज्यादा बड़ा मुद्दा है। हालांकि NBFCs पर दोहरी मार तो देखने को मिलेगी साथ ही बैंक लोन ग्रोथ में सुस्ती भी आयेगी।

    बैंक, NBFCs और कंज्यूमर पर RBI के फैसले का असर

    आरबीआई के सख्त फैसले से अब बैंकों और NBFCs को कंज्यूमर लोन देने के लिए ज्यादा प्रोविजनिंग करनी होगी। NBFCs के लिए फंड जुटाना महंगा होगा। दूसरी तरफ कंज्यूमर पर ये असर होगा कि आरबीआई के फैसले के बाद कंज्यूमर लोन महंगे होंगे। नए और पुराने दोनों लोन की दरें बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

    डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

     

     

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