RBI Plastic Notes: कागजी नोटों की छुट्टी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों की छपाई कर रहा RBI, जानिए इसके पीछे की वजह

RBI Plastic Notes: नए नोट बाजार में मौजूद कागजी नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में चलाए जाएंगे। यानी कागजी नोट बंद नहीं होंगे। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में ₹100 और ₹500 जैसे बड़े नोटों को भी पॉलीमर में बदलने का रास्ता साफ हो सकता है

अपडेटेड Jul 30, 2026 पर 3:38 PM
प्लास्टिक के नोटों की मोटाई, टेक्सचर और लचीलापन कागजी नोटों से काफी अलग होता है

RBI Polymer Banknotes Pilot Project: भारतीय रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट लाने की तैयारी में है। सरकार ने संसद में पुष्टि की है कि आरबीआई को ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की मंजूरी दे दी गई है।

यह नोट बाजार में मौजूद कागजी नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में चलाए जाएंगे। यानी कागजी नोट बंद नहीं होंगे। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में ₹100 और ₹500 जैसे बड़े नोटों को भी पॉलीमर में बदलने का रास्ता साफ हो सकता है। आइए आपको बताते हैं आरबीआई इसके लिए सिर्फ ₹10 और ₹20 के नोट ही क्यों चुन रहा है और इसके पीछे क्या वजहें हैं।

ट्रायल के लिए ₹10 और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?


आरबीआई द्वारा पॉलीमर नोटों के परीक्षण के लिए छोटे नोटों को चुनने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े आर्थिक और तकनीकी कारण हैं:

सर्कुलेशन में ज्यादा पर वैल्यू में कम: देश में कुल करेंसी नोटों की संख्या में ₹10 और ₹20 के नोटों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है, लेकिन कुल करेंसी वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी महज 1.4 प्रतिशत ही है।

कम वित्तीय जोखिम: अगर ट्रायल के दौरान किसी तरह की तकनीकी खामी, फर्जीवाड़े या ऑपरेशनल असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो भी इससे देश की अर्थव्यवस्था या वित्तीय व्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

एटीएम री-कैलिब्रेशन के बड़े झंझट से बचाव

पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोटों की मोटाई, टेक्सचर और लचीलापन कागजी नोटों से काफी अलग होता है। ₹10 और ₹20 के नोट मुख्य रूप से बैंकों के कैश काउंटर और लोकल मार्केट में सीधे बांटे जाते हैं, इन्हें एटीएम के जरिए बहुत कम निकाला जाता है।

अगर आरबीआई सीधे ₹100 या ₹500 के पॉलीमर नोट जारी करता, तो देशभर के लाखों एटीएम और कैश रिसाइक्लर मशीनों के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को तुरंत बदलना पड़ता। छोटे नोटों से ट्रायल शुरू करके आरबीआई एटीएम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित किए बिना नोटों की क्वालिटी परख सकता है।

नोटों की लंबी उम्र और री-प्रिंटिंग का घटता खर्च

₹10 और ₹20 के नोट आम जनता, सब्जी मंडियों, बस-ट्रेन के किराए और दैनिक लेनदेन में सबसे ज्यादा हाथों-हाथ घूमते हैं। इस वजह से ये नोट बहुत जल्दी फटने, गंदे होने या गलने लगते हैं। पॉलीमर नोट पानी, नमी, धूल-मिट्टी और घिसावट से खराब नहीं होते। इनकी लाइफ कागजी नोटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है।

हालांकि पॉलीमर नोटों की शुरुआती छपाई कागजी नोटों से थोड़ी महंगी होती है, लेकिन बार-बार खराब नोटों को बदलने और नए नोट छापने का आरबीआई का सालाना अरबों रुपये का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।

जालसाजी रोकने और पब्लिक रिस्पॉन्स जांचने का मौका

इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए आरबीआई कई अहम पहलुओं की जांच करेगा:

सुरक्षा फीचर्स: क्या जालसाज या असामाजिक तत्व इन नए पॉलीमर नोटों के सिक्योरिटी फीचर्स की नकल कर पा रहे हैं या नहीं।

जनता की स्वीकार्यता: भारतीय मौसम गर्मी, बारिश, नमी और भारतीय जनता के इस्तेमाल करने के तरीकों के बीच यह नोट कितने कारगर रहते हैं।

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