Budget 2026: क्या नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में मिलेगी बड़ी छूट? इनकम टैक्स से जुड़ी 10 बड़ी उम्मीदें

Budget 2026: केंद्र सरकार रविवार 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही है। इस बजट से सैलरी क्लास के लोगों को खासा उम्मीदें हैं। खासकर इनकम टैक्स से जुड़े नियमों को लेकर। जानकारों का मानना है कि बजट 2026 का फोकस देश में कंज्प्शन बढ़ाने, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और टैक्स बेस को व्यापक करने पर रह सकता है

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 3:17 PM
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Budget 2026: टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बड़ी छूट की संभावना कम है

Budget 2026: केंद्र सरकार रविवार 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही है। इस बजट से सैलरी क्लास के लोगों को खासा उम्मीदें हैं। खासकर इनकम टैक्स से जुड़े नियमों को लेकर। जानकारों का मानना है कि बजट 2026 का फोकस देश में कंज्प्शन बढ़ाने, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और टैक्स बेस को व्यापक करने पर रह सकता है। हालांकि बजट में किसी बड़े टैक्स कटौती की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन कुछ व्यावहारिक सुधार और छोटे-छोटे बदलाव सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए राहत बन सकते हैं।

आइए जानते हैं कि बजट 2026 से सैलरी वाले कर्मचारियों की क्या बड़ी उम्मीदें हैं-

1. टैक्स स्लैब में सीमित राहत की उम्मीद

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बड़ी छूट की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि पिछले बजट में टैक्स स्लैब में काफी बड़े बदलाव किए गए थे। हालांकि, यह उम्मीद जताई जा रही है कि स्लैब को महंगाई के अनुरूप एडजस्ट किया जाए, क्योंकि इनकम बढ़ने के बावजूद महंगाई के चलते लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाती और टैक्सपेयर्स ऊंचे टैक्स स्लैब में पहुंच जाते हैं।


2. स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की मांग

नई टैक्स व्यवस्था के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। आखिरी बार इसमें बढ़ोतरी 2024 के बजट में हुई थी। महंगाई को देखते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने से सैलरीड कर्मचारियों की डिस्पोजेबल इनकम में सीधा इजाफा हो सकता है।

3. TDS सिस्टम को सरल बनाने की संभावना

बजट 2026 में TDS दरों को तर्कसंगत बनाने की उम्मीद भी जताई जा रही है। फिलहाल अलग-अलग तरह के लेन-देन पर कई TDS दरें लागू हैं, जिससे सिस्टम जटिल हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार अधिकतर ट्रांजैक्शंस के लिए 2-3 स्टैंडर्ड TDS रेट लागू कर सकती है, जिससे टैक्स कंप्लायंस आसान होगा।

4. जारी रह सकती है ओल्ड टैक्स रेजीम

सरकार लंबे समय में ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Regime) को खत्म करने का संकेत देती रही है, लेकिन बजट 2026 में इसके पूरी तरह हटने की संभावना कम है। अभी भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स डिडक्शंस और छूट के कारण ओल्ड रिजीम को चुनते हैं। इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा सकता है, न कि अचानक।

5. टैक्स प्रशासन में और सुधार की उम्मीद

टैक्स कानूनों को और सरल बनाने और विवादों के निपटारे के सिस्टम को तेज और बनाने की घोषणा बजट 2026 में हो सकती है। बीते सालों में टैक्स असेसमेंट को डिजिटल किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन असेसमेंट और अपील मामलों के निपटारे की रफ्तार अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार इस दिशा में नए सुधार ला सकती है।

6. होम लोन ब्याज पर छूट बढ़ने की उम्मीद

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की अधिकतम डिडक्शन सीमा को बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। यह सीमा करीब एक दशक पहले तय की गई थी और मौजूदा प्रॉपर्टी कीमतों के मुकाबले अब कम प्रभावी हो गई है।

7.  इनकम टैक्स कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन की दिशा में कदम

बजट 2026 में इनकम टैक्स कानूनों को और डी-क्रिमिनलाइज किए जाने की संभावना है। पिछले बजट में TCS से जुड़े कुछ प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया था। उसी कड़ी में आगे भी कई तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक दायरे से हटाया जा सकता है।

8. कैपिटल गेन टैक्स में अस्पष्टता दूर होने की उम्मीद

मर्जर और अधिग्रहण (M&A) जैसे सौदों में कंटिंजेंट कंसीडरेशन (भविष्य की शर्तों पर आधारित भुगतान) पर कैपिटल गेन टैक्स को लेकर काफी अस्पष्टता है। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में इस पर स्पष्ट नियम लाए जाएंगे, जिससे ऐसे सौदों में टैक्स कैलकुलेशन आसान हो सके।

9. इलेक्ट्रिक कार पर मिलने वाले पर्क्विजिट नियमों में बदलाव संभव

फिलहाल कर्मचारियों को दी जाने वाली कार पर मिलने वाले पर्क्विजिट की वैल्यू इंजन क्षमता के आधार पर तय होती है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में प्रासंगिक नहीं है। बजट 2026 में ईवी कारों के लिए अलग पर्क्विजिट वैल्यूएशन नियम जोड़े जा सकते हैं।

10. रोजगार बढ़ाने के लिए सेक्शन 80JJAA में राहत

सरकार रोजगार पैदा होने के मौकों को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80JJAA के तहत नए कर्मचारियों की लागत पर मिलने वाली कटौती की सीमा बढ़ा सकती है। मौजूदा आर्थिक हालात में रोजगार के मौके बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता बना हुआ है। ऐसे में यह कदम कंपनियों को नई भर्तियां करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

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