इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने सरकार को मैरीड कपल के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन शुरू करने की सलाह दी है। अगर सरकार आईसीएआई की यह सलाह मान लेती है तो इससे बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। कई देशों में यह प्रैक्टिस लागू है। आइए मैरीज कपल के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
इनकम टैक्स एक्ट के तहत अभी हर व्यक्ति को टैक्स के लिहाज से अगल इंडिविजुअल माना जाता है। कोई व्यक्ति शादीशुदा है या अविवाहित है, इससे टैक्स के मामले में कोई फर्क नहीं पड़ता है। हर इंडिविजुअल को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है। इसका मतलब है कि अगर पति और पत्नी दोनों की इनकम है तो दोनों को अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।
Institute of Chartered Accountants of India ने सरकार को दिए अपनी सलाह में कहा है कि मैरीड कपल को ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने का विकल्प दिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि इस विकल्प का इस्तेमाल करना उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा। अगर किसी मैरीड कपल को इस विकल्प में फायदा नजर आता है तो वह इसका इस्तेमाल करेगा। अगर उसे फायदा नजर नहीं आता है तो पति और पत्नी इंडिविजुअल रिटर्न फाइल कर सकेंगे।
ज्वाइंट टैक्सेशन के फायदे
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मैरीड कपल के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन शुरू करने के कई फायदे हैं। इससे कंप्लायंस बढ़ेगा। बड़ी संख्या में लोग टैक्स सिस्टम के दायरे में आएंगे। कई परिवारों खासकर सिंगल इनकम वाले परिवारों पर टैक्स का बोझ कम होगा। अभी परिवार में पुरुष तो इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं। लेकिन, परिवार की महिला सदस्यों की रिटर्न फाइल करने में दिलचस्पी कम होती है। दुनिया के कई देशों में इस तरह की प्रैक्टिस पहले से है। इनमें जर्मनी, स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं।
ज्वाइंट टैक्सेशन के स्लैब्स
ICAI ने मैरीड कपल के लिए टैक्स रेट्स के प्रस्ताव दिए हैं। इसके मुताबिक, 6 लाख रुपये तक की इनकम वाले मैरीड कपल के लिए टैक्स जीरो होना चाहिए। 6 से 14 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स का रेट 5 फीसदी, 14 से 20 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स का रेट 10 फीसदी, 20-24 लाख रुपये तक की इनकम पर रेट 15 फीसदी, 24 से 30 लाख रुपये तक की इनकम पर 20 फीसदी और 30 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर टैक्स के रेट 30 फीसदी रखने का प्रस्ताव दिया गया है।
दोनों को स्टैंडर्ड डिडक्शन के फायदे
ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये किया जा सकता है। आईसीएआई ने सरचार्ज के लिए लिमिट 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की सलाह दी है। इस नियम के लागू होने पर मैरीड कपल में से पति और पत्नी दोनों को स्टैंडर्ड डिडक्शन के भी फायदे मिलेंगे।