भारत में इंश्योरेंस लेते समय इन बातों को रखें ध्यान, वरना बाद मे होंगे परेशान
Insurance: जब भी लोग इंश्योरेंस खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (CSR) पर ध्यान देते हैं। यानी कंपनी कितने प्रतिशत क्लेम का पेमेंट करती है। यह एक अहम पैमाना जरूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ CSR देखकर इंश्योरेंस लेना सही नहीं
Insurance: जब भी लोग इंश्योरेंस खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (CSR) पर ध्यान देते हैं।
Insurance: जब भी लोग इंश्योरेंस खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (CSR) पर ध्यान देते हैं। यानी कंपनी कितने प्रतिशत क्लेम का पेमेंट करती है। यह एक अहम पैमाना जरूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ CSR देखकर इंश्योरेंस लेना सही नहीं। पॉलिसी की डिटेल, कंपनी की फाइनेंशियल हालत और ग्राहक अनुभव भी उतना ही जरूरी है। भारत में इंश्योरेंस लेने से पहले इन बातों को पर जरूर ध्यान दें। वरना बाद में आप परेशान हो सकते हैं।
पॉलिसी कवरेज और सम एश्योर्ड
प्रोबस के डायरेक्टर राकेश गोयल बताते हैं कि CSR के अलावा सबसे पहले सम एश्योर्ड देखना जरूरी है। यह इतनी अमाउंट होनी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को संभाल सके। इसके अलावा यह भी चेक करना जरूरी है कि पॉलिसी में क्या-क्या शामिल है और क्या नहीं।
एक्सक्लूजन (क्या कवर नहीं है)
अतिरिक्त बेनिफिट्स या राइडर्स
वेटिंग पीरियड (खासकर हेल्थ इंश्योरेंस में)
नजदीकी नेटवर्क अस्पताल या गैराज (हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में)
गोयल का कहना है कि प्रीमियम ऐसा होना चाहिए जिसे आप लंबे समय तक आराम से भर सकें।
इंश्योरेंस कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति
एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर अनुप सेठ कहते हैं कि लोग अक्सर प्रीमियम देखकर इंश्योरेंस चुनते हैं। लेकिन यह सिर्फ फाइनेंशियल लेन-देन नहीं, बल्कि एक लंबा रिश्ता है जो भविष्य में आपके परिवार की लाइफलाइन बन सकता है।
उनके अनुसार इंश्योरेंस कंपनी की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ देखना जरूरी है।
कंपनी के AUM (Assets Under Management) की जांच करें।
सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट से जुड़ी पॉलिसी में पिछले रिटर्न्स देखें।
गारंटीड रिटर्न प्लान में टैक्स के बाद असल रिटर्न चेक करें।
ULIPs में कई सालों का IRR/XIRR और छुपे चार्जेज (फंड मैनेजमेंट, मोर्टेलिटी चार्ज) ध्यान से देखें।
ग्राहक अनुभव और ट्रांसपेरेंसी
CSR यह नहीं बताता कि क्लेम प्रोसेस कितना आसान है। सेठ के मुताबिक अगर क्लेम प्रोसेस महीनों तक खिंच जाए तो परिवार की परेशानी बढ़ जाती है।