राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें एक पत्नी की राइट टु इन्फॉर्मेशन (RTI) अर्जी खारिज कर दी गई थी। पत्नी ने अपने पति की सैलरी से जुड़ी जानकारी उस सरकारी विभाग से मांगी थी, जहां वह कार्यरत है।
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें एक पत्नी की राइट टु इन्फॉर्मेशन (RTI) अर्जी खारिज कर दी गई थी। पत्नी ने अपने पति की सैलरी से जुड़ी जानकारी उस सरकारी विभाग से मांगी थी, जहां वह कार्यरत है।
कोर्ट ने साफ कहा कि किसी कर्मचारी की सर्विस रिकॉर्ड, परफॉर्मेंस और वेतन से जुड़ी जानकारी 'पर्सनल इंफॉर्मेशन' होती है। इसे RTI कानून के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सैलरी की जानकारी तीसरे पक्ष से जुड़ी मानी जाती है। इसे तभी साझा किया जा सकता है, जब कोई बड़ा और ठोस जनहित उससे जुड़ा हो।
अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा
दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता अनादी मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Girish Ramchandra Deshpande v. CIC का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया था कि नौकरी और सर्विस से जुड़ी जानकारियां मुख्य रूप से कर्मचारी और नियोक्ता के बीच का मामला होती हैं।
हालांकि, अगर वैवाहिक विवाद या मेंटेनेंस का मामला लंबित हो, तो स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में आय की जानकारी जरूरी मानी जाती है, ताकि मेंटेनेंस की सही रकम तय की जा सके।
सैलरी से जुड़ा मामला क्या था?
यह विवाद पति पत्नी के बीच आरटीआई के जरिए सैलरी जानकारी मांगने को लेकर था। कांता कुमावत के पति ओमप्रकाश कुमावत पुलिस विभाग में काम करते हैं। कांता ने अपने पति की जनवरी से मार्च 2024 तक की सैलरी स्लिप की कॉपी मांगते हुए आरटीआई आवेदन दिया। विभाग ने यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर दिया कि सैलरी डिटेल तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है। इसे आरटीआई कानून के तहत छूट मिली हुई है।
अक्टूबर 2024 में कांता कुमावत ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने अदालत से जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की। हाई कोर्ट ने कहा कि सैलरी और सर्विस से जुड़ी जानकारी निजी है। यह कर्मचारी और नियोक्ता के बीच का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले पर भरोसा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई बड़ा जनहित साबित न हो, ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। चूंकि इस मामले में ऐसा कोई जनहित सामने नहीं आया, इसलिए याचिका खारिज कर दी गई।
किन हालात में पत्नी सैलरी स्लिप मांग सकती है?
पत्नी कुछ खास परिस्थितियों में ही पति की सैलरी स्लिप मांग सकती है। Accord Juris के मैनेजिंग पार्टनर आलय रजवी के मुताबिक, आरटीआई कानून की धारा 8(1)(j) के तहत सैलरी की जानकारी को निजी माना जाता है। इसे आमतौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि लेकिन अगर पति पत्नी के बीच मेंटेनेंस या एलिमनी से जुड़ा मामला अदालत में चल रहा हो, तो अदालत आय की जानकारी उपलब्ध कराने की अनुमति दे सकती है। ऐसे मामलों में पत्नी को तीसरा पक्ष नहीं माना जाता, क्योंकि मेंटेनेंस तय करने के लिए सही आय की जानकारी जरूरी होती है।
अगर कोई वैवाहिक विवाद या मेंटेनेंस का मामला लंबित नहीं है, तो कर्मचारी की निजता की रक्षा के लिए ऐसे आवेदन आमतौर पर खारिज कर दिए जाते हैं।
क्या इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी मिल सकती है?
पत्नी सामान्य स्थिति में आरटीआई के जरिए पति का इनकम टैक्स रिटर्न नहीं मांग सकती। यह भी निजी जानकारी मानी जाती है। Legum Solis के फाउंडर शशांक अग्रवाल के मुताबिक, आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी पर्सनल इंफॉर्मेशन है। इसे सार्वजनिक करने से कानून के तहत छूट मिली हुई है। हालांकि, अगर मामला मेंटेनेंस या एलिमनी से जुड़ा हो, तो अदालत अलग निर्देश दे सकती है।
अलग अलग अदालतों के फैसले क्या कहते हैं?
Elarra Law Offices की पार्टनर सुप्रिया मजूमदार ने बताया कि इस मुद्दे पर विभिन्न अदालतों ने अलग अलग परिस्थितियों में फैसले दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मेंटेनेंस से जुड़े वैवाहिक मामलों में दोनों पक्षों को अपनी आय, संपत्ति, खर्च और देनदारियों की पूरी जानकारी हलफनामे के जरिए देनी चाहिए। इससे अदालत को उचित मेंटेनेंस तय करने में मदद मिलती है।
सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्विस, करियर, संपत्ति और देनदारियों से जुड़ी जानकारी आरटीआई के तहत निजी मानी जाती है। बिना जनहित के इसे साझा नहीं किया जा सकता। ऐसा करना निजता का उल्लंघन होगा।
हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि जब पति पत्नी के बीच विवाद हो, तो पत्नी को पति की आय जानने का अधिकार हो सकता है। इसी फैसले का हवाला देते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने भी माना कि मेंटेनेंस तय करने के लिए पति की सर्विस और वेतन से जुड़ी जानकारी दी जा सकती है।
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