Noida Workers Protest Affect: देश में मजदूरों की इनकम बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार बड़ा फैसला ले सकती है। केंद्र सरकार नेशनल न्यूनतम वेज (National Floor Wage) को मौजूदा 176 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 350 से 450 रुपये के बीच करने पर विचार कर रही है। यह कदम हाल के नोएडा में मजदूर प्रदर्शनों, कई राज्यों के न्यूनतम वेज बढ़ाने और बढ़ती महंगाई के बीच उठाया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो मजदूरों की डेली और मंथली इनकम में इजाफा हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार लेबर मिनिस्ट्री नया सैलरी स्ट्रक्चर तैयार कर रहा है, जिसमें अनस्किल्ड, सेमी स्किल्ड और स्किल्ड सभी तरह के मजदूर शामिल होंगे। अगर यह नया फ्लोर वेज लागू होता है, तो देश के सभी राज्यों को अपनी न्यूनतम वेज इसी के अनुसार तय करनी होगी। यानी कोई भी राज्य केंद्र की तय सीमा से कम वेज नहीं दे सकेगा।
मंथली सैलरी पर क्या होगा असर?
नए नियम के तहत वेज का कैलकुलेशन 26 दिनों के हिसाब से की जाएगी। यानी अगर दिहाड़ी 350 रुपये तय होती है, तो मंथली इनकम करीब 9,100 रुपये होगी, और 450 होने पर यह करीब 11,700 रुपये तक पहुंच सकती है।
पिछली बार राष्ट्रीय फ्लोर वेज 2017 में 176 रुपये तय की गई थी। इसके बाद महंगाई लगातार बढ़ी है, लेकिन वेज में उतनी तेजी से इजाफा नहीं हुआ। इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के अनुसार कंपनियों का मुनाफा स्थिर बना हुआ है, लेकिन कर्मचारियों की सैलरी उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। खासकर एंट्री लेवल नौकरियों में वेतन उतना नहीं बढ़ा है। इसी वजह से मजदूर संगठनों में असंतोष बढ़ा है और कई राज्यों को हाल ही में वेज बढ़ानी पड़ी है।
राज्यों ने पहले ही बढ़ाए वेतन
हरियाणा ने न्यूनतम वेज में करीब 35% तक बढ़ोतरी की है, जिससे अकुशल मजदूरों की मासिक सैलरी लगभग 15,200 रुपये हो गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी नोएडा और गाजियाबाद में वेज बढ़ाई गई है। यहां अकुशल मजदूरों की सैलरी 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। इसी तरह अर्ध-कुशल मजदूरों की सैलरी 15,059 रुपये और कुशल मजदूरों की 16,868 रुपये तक पहुंच गई है।
अन्य राज्य भी कर सकते हैं बदलाव
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य पहले से ज्यादा वेज देते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे भी समीक्षा कर सकते हैं। बिहार और पंजाब जैसे राज्यों में भी वेतन बढ़ाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है।
नए लेबर कोड के तहत होगा बदलाव
यह पूरा बदलाव नए लेबर कानूनों के तहत किया जा रहा है। Code on Wages, 2019 के अनुसार केंद्र सरकार एक न्यूनतम फ्लोर वेज तय करती है, जो पूरे देश के लिए आधार यानी बेससाइन की तरह होत है। इसके अलावा अन्य तीन कोड इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड भी लागू हो चुके हैं।