CGHS: अगर नहीं किया ये काम, तो नहीं मिलेगा हॉस्पिटल क्लेम, सरकार ने बदले नियम

CGHS: केंद्र सरकार ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS)के तहत इलाज करवा रहे मरीजों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अस्पतालों को अब हर दिन मरीजों की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने नियम बदल दिये हैं

अपडेटेड Aug 06, 2025 पर 7:19 PM
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CGHS: केंद्र सरकार ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS)के तहत इलाज करवा रहे मरीजों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है।

CGHS: केंद्र सरकार ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS)के तहत इलाज करवा रहे मरीजों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अस्पतालों को अब हर दिन मरीजों की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने नियम बदल दिये हैं। ये नियम सरकार ने इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) के लिए बदले हैं। सरकार ने इस नियम में एक बार के लिए छूट दी है।

पुराने नियमों पर दी गई छूट

पहले IPD मरीजों की रोजाना जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करना जरूरी था। लेकिन अब सरकार ने यह नियम हटाते हुए कहा है कि जिस तारीख को पुराना आदेश आया था, वहां से लेकर नए आदेश की तारीख तक के पीरियड के लिए यह नियम लागू नहीं होगा। यानी, इस दौरान फोटो अपलोड न करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी

क्या करना होगा अस्पतालों को?

जिन मरीजों के केस में पहले फोटो अपलोड नहीं की गई थी, उनके डॉक्युमेंट्स जब दोबारा TMS पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, तो अस्पतालों को नए आदेश की कॉपी भी साथ में लगानी होगी।


नए नियमों के अनुसार

IPD रेफरल केस (जहां मरीज को रेफर किया गया है और रेफरल वैलिड है।) कोई फोटो जरूरी नहीं है।

IPD नॉन-रेफरल केस (जहां रेफर नहीं किया गया)।

भर्ती के समय एक फोटो

डिस्चार्ज के समय एक फोटो

अगर भर्ती 7 दिन से ज्यादा हो, तो हर सातवें दिन एक एक्स्ट्रा फोटो जरूरी होगी।

OPD मामलों के लिए

रेफरल वाले केस: कोई फोटो जरूरी नहीं।

बिना रेफरल केस

70 साल से ऊपर के मरीजों के लिए।

रेफरल से जुड़ा फॉलो-अप जिसमें नया रेफरल नहीं लिया गया हो।

बिस्तर पर पड़े मरीजों के लिए वीडियो कॉल की स्क्रीनशॉट भी मान्य है।

इन सभी में जियो-टैग्ड फोटो जरूरी है।

फोटो अपलोड करने के नियम

फोटो मोबाइल या टैबलेट से खींची जाए जो ऑटोमैटिक जियो-टैगिंग करता हो।

फोटो 1 MB से बड़ी नहीं होनी चाहिए।

फोटो रियल टाइम में या 24 घंटे के अंदर अपलोड करनी होगी।

अस्पतालों को सभी फोटो की लोकल कॉपी कम से कम 90 दिन तक अपने पास रखनी होगी, ताकि ऑडिट के समय दिखा सकें।

नहीं करने पर क्या होगा?

अगर कोई अस्पताल इन नए नियमों का पालन नहीं करता, तो CGHS के तहत उसकी पेमेंट रोकी जा सकती है या क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है।

ये नियम कब से लागू हैं?

ये नए दिशा-निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं और आगे के आदेश तक मान्य रहेंगे। यह बदलाव मरीजों और अस्पतालों दोनों के लिए राहत भरा है, लेकिन सभी को नए नियमों के अनुसार जरूरी डॉक्युमेंटेशन करना अनिवार्य रहेगा।

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