CIBIL Score: एक समय था जब ऊंचा CIBIL स्कोर लोन मिलने का सबसे बड़ा आधार माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। बैंक और NBFC अब सिर्फ इस एक नंबर पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि आपकी पूरी फाइनेंशियल स्थिति को समझकर फैसला ले रहे हैं।
CIBIL Score: एक समय था जब ऊंचा CIBIL स्कोर लोन मिलने का सबसे बड़ा आधार माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। बैंक और NBFC अब सिर्फ इस एक नंबर पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि आपकी पूरी फाइनेंशियल स्थिति को समझकर फैसला ले रहे हैं।
अब लोन देने का तरीका ज्यादा डेटा-बेस्ड और गहराई वाला हो गया है। सिर्फ पुराने रिपेमेंट रिकॉर्ड नहीं, बल्कि आपकी मौजूदा इनकम, खर्च और व्यवहार भी उतने ही अहम हो गए हैं।
SalarySe के को-फाउंडर पीयूष बगारिया के मुताबिक, अब लेंडर्स CIBIL स्कोर को अकेले फैसला लेने का आधार नहीं मानते। उनका कहना है कि अच्छा स्कोर सिर्फ एक हिस्सा है, असली तस्वीर उसके अंदर छिपे फैक्टर्स से बनती है। अब क्रेडिट मॉडल ज्यादा एडवांस हो चुके हैं और सिर्फ स्कोर देखकर निर्णय नहीं लिया जाता।
अब कई चीजों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। जैसे कि क्रेडिट कितना इस्तेमाल हो रहा है, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी लंबी है, इनकम कितनी नियमित है। इसी वजह से कई बार अच्छा स्कोर होने के बावजूद लोन रिजेक्ट हो जाता है।
कैश फ्लो और EMI का दबाव बड़ा फैक्टर
Olyv के को-फाउंडर जयंत उपाध्याय के मुताबिक, अब लोन देने का फैसला आपकी मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति पर ज्यादा निर्भर करता है, न कि सिर्फ पुराने रिकॉर्ड पर। अब यह देखा जाता है कि आपकी इनकम कितनी स्थिर है, पहले से कितनी EMI चल रही है, हर महीने का कैश फ्लो कितना भरोसेमंद है और आप नया लोन आराम से चुका पाएंगे या नहीं।
अगर इन चीजों में दबाव दिखता है, तो अच्छा CIBIL स्कोर होने के बावजूद लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री बहुत कम होती है। यानी जिनकी 'थिन फाइल' होती है, उनके मामले में लेंडर्स को सही आकलन करने में दिक्कत आती है।
पूरी फाइनेंशियल तस्वीर देख रहे लेंडर्स
Zaggle के फाउंडर राज पी नारायणम के मुताबिक, CIBIL स्कोर अब सिर्फ एक हिस्सा रह गया है। उन्होंने कहा कि यह स्कोर आपके पिछले व्यवहार के बारे में बताता है, लेकिन यह नहीं बताता कि आगे आप कैसे व्यवहार करेंगे।
अब लेंडर्स बैंकिंग डेटा, GST रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन डिटेल्स को मिलाकर आपकी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल समझने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक, अब मकसद सिर्फ जोखिम से बचना नहीं, बल्कि उधार लेने वाले को बेहतर तरीके से समझना भी है।
कर्ज का बोझ तय कर रहा है लोन मिलेगा या नहीं
Choice Finserv के CEO विजेंद्र सिंह के मुताबिक, अब लोन अप्रूवल में सबसे बड़ा रोल आपके मौजूदा कर्ज का है। उन्होंने कहा कि CIBIL स्कोर यह बताता है कि आपने पहले कैसा व्यवहार किया, लेकिन यह नहीं बताता कि इस समय आपकी आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है।
अगर आपकी इनकम के मुकाबले कर्ज ज्यादा है, तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है, भले ही आपका स्कोर अच्छा हो। विजेंद्र ने यह भी कहा कि जिन लोगों की लंबी और अलग-अलग तरह की क्रेडिट हिस्ट्री होती है, उन्हें ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।
स्कोर से आगे बढ़कर हो रहा है फैसला
BharatLoan के बिजनेस हेड शक्ति शेखावत के मुताबिक, अब यह देखा जाता है कि खर्च और EMI के बाद आपके पास कितना पैसा बचता है। उन्होंने कहा कि अच्छा CIBIL स्कोर दरवाजा खोल सकता है, लेकिन अंदर जाने की गारंटी नहीं देता।
Rupee112 के बिजनेस हेड कुलदीप युधुवंशी के मुताबिक, अब लोन का फैसला सिर्फ एक नंबर पर नहीं, बल्कि पूरे व्यवहार पर होता है। अब लेंडर्स इस बात पर नजर रखते हैं कि आपका बैंक बैलेंस कैसे बदलता है, आप कितनी बार उधार लेते हैं और आपकी इनकम कितनी स्थिर है।
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