चावल (Rice) के निर्यात (Export) पर रोक लगाने के बाद सरकार अब दालों (Pulses) और गेहूं (Wheat) की बढ़ती कीमतों को रोकने के उपायों पर विचार कर सकती है। इस मामले से जुड़े एक आधिकारी ने ये जानकारी दी है। उन्होंने कहा, "कीमतें मजबूत हो गई हैं, इसलिए नीतिगत उपायों पर गौर करना बहुत जरूरी है। मेज पर मौजूद विकल्पों में इंपोर्ट और कस्टम ड्यूटी में बदलाव, इन वस्तुओं की कुछ किस्मों के लिए निर्यात-संबंधी कदम, साथ ही डिमांड-सप्लाई परिदृश्य को सुचारू बनाने के लिए दूसरे कदम उठाए जाएं।"
कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ उपाय पहले से ही मौजूद हैं। सरकार ने पिछले साल मई से गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध को अभी तक नहीं हटाया है, और दालों के लिए तुअर और उड़द पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर तक जीरो रखा है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के एक नोटिफिकेशन के अनुसार, घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगी दी। चावल में साल-दर-साल 12.97 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
हालांकि, अधिकारी ने कहा कि हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं और गेहूं और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए किस तरह के नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है, इस पर अंतिम फैसला मंत्रालय की एक इंटरनल कमेटी के विचार-विमर्श पर निर्भर करेगा।
2023-24 के लिए प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कुछ दालों के लिए 40 प्रतिशत की खरीद लिमिट को हटाने समेत सरकारी हस्तक्षेप के बाद भी, अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों की कीमतें बढ़ रही हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि तुअर में 32 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।
दूसरी ओर, उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की कीमतें सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत बढ़कर 16 जुलाई को 29.41 रुपए प्रति किलोग्राम हो गईं, जो एक साल पहले 27.80 रुपए थी।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अध्यक्ष अशोक मीना ने कथित तौर पर पिछले महीने कहा था कि गेहूं की रिटेल कीमतें बढ़ने के साथ, जरूरत पड़ने पर सरकार गेहूं पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर विचार कर सकती है। फिलहाल गेहूं पर 40 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी है।
भारत में पिछले कुछ महीनों में गेहूं, चावल, दूध, सब्जियों और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ खाने-पीने की दूसरी चीजों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुल मिलाकर, फूड इंफ्लेशन मई के 2.96 प्रतिशत से बढ़कर जून में 4.49 प्रतिशत हो गई, जिससे पिछले महीने का रिटेल इंफ्लेशन मई के 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.81 प्रतिशत हो गया।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी का कहना है कि अगले कुछ महीनों में अनाज और दालों की कीमतों बढ़ोतरी जारी रहेगी। उन्होंने 18 जुलाई को Moneycontrol के पैनल में कहा था,"हालांकि, सब्जियों की कीमत में उछाल मौसमी हो सकता है। हमें अगले कुछ महीनों तक अनाज और दालों की बढ़ती कीमतों को सहन करना पड़ सकता है।”