Agriculture Loan: देश के किसान मानसून पर ही निर्भर रहते हैं। कभी बारिश न होने से सूखे की मार पड़ती है तो कभी अधिक बारिश होने से फसल बर्बाद हो जाती है। ऐसे में किसानों को कई तरह की वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा किसानों को कर्ज की टेंशन रहती है। लेकिन अब राजस्थान सरकार ने चुनावी साल को देखते हुए किसानों को बड़ी राहत दी है। अशोक गहलोत सरकार ने किसानों को लुभाने के लिए बड़ा दांव चल दिया है। सरकार ने किसान कर्ज माफी पर आयोग बनाने का एक बिल पास कर दिया है।
आयोग बनने के बाद बैंक और कोई भी फाइनेंशियल संस्था किसी भी कारण से फसल खराब होने की हालत में किसानों से जबरन कर्ज वसूली या कर्ज देने का दबाव नहीं बना सकेंगे। किसान फसल खराब होने पर कर्ज माफी की मांग करते हुए इस आयोग में अप्लाई करेंगे। आयोग बनने से अब फसल खराब होने पर लगातार कर्ज माफी का रास्ता खुला रहेगा और इससे केवल जरूरतमंद किसानों को मदद मिलेगी।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनेगा किसान कर्ज राहत आयोग
राज्य किसान कर्ज राहत आयोग में अध्यक्ष सहित 5 मेंबर होंगे। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अध्यक्ष होंगे। आयोग में एसीएस या प्रमुख सचिव रैंक पर रहे रिटायर्ड IAS, जिला और सेशन कोर्ट से रिटायर्ड जज, बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुके अफसर और एक एग्रीकल्चर एक्सपर्ट को मेंबर बनाया जाएगा। सहकारी समितियों के एडिशनल रजिस्ट्रार स्तर के अफसर को इसका सदस्य सचिव बनाया जाएगा। इस आयोग का कार्यकाल तीन साल का होगा। आयोग के अध्यक्ष और मेंबर का कार्यकाल भी तीन साल का होगा। सरकार अपने स्तर पर आयोग की अवधि को बढ़ा भी सकेगी और किसी भी मेंबर को हटा सकेगी।
पूरे जिले को भी घोषित कर सकता है संकटग्रस्त
किसान कर्ज राहत आयोग को कोर्ट जैसे पावर होंगे। अगर किसी इलाके में फसल खराब होती है और इसकी वजह से किसान बैंकों से लिया हुआ कृषि कर्ज चुका नहीं पाता है तो ऐसी स्थिति में आयोग को उस किसान और क्षेत्र को संकटग्रस्त घोषित करके उसे राहत देने का आदेश देने का अधिकार होगा।
कर्ज नहीं चुका पाने को लेकर अगर किसान ने अप्लाई किया है या आयोग खुद अपने स्तर पर समझता है कि हालत वाकई खराब है। ऐसी स्थिति में आयोग स किसान को संकटग्रस्त किसान घोषित कर सकता है। संकटग्रस्त किसान का मतलब है कि उसकी फसल खराबे की वजह से वह कर्ज चुका पाने की स्थिति में नहीं हैं। संकटग्रस्त किसान घोषित होने के बाद बैंक उस किसान से जबरदस्ती कर्ज की वसूली नहीं कर सकेगा।
इसके अलावा जब तक मामला आयोग के पास लंबित रहेगा तब तक किसान के खिलाफ किसी भी तरह का मुकदमा, आवेदन, अपील और याचिका पर रोक रहेगी।