Delhi Electricity Bill: दिल्ली में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है। इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन जिनके यहां एक महीने में 200 यूनिट से अधिक बिजली खप रही है, उन्हें करारा झटका लगा है। इसी कारण दिल्लीवासियों को बिना रेट में बदलाव के महंगे बिल से जूझना पड़ रहा है। तगड़ा बिल आने की वजह ये है कि दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों को पावर पर्चेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPPC) में 9% बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद तीनों कंपनियों ने बिजली के दाम बढ़ा दिए। अब इसी इजाफे के चलते 200 यूनिट से खपत करने वाले दिल्लीवासियों को बिजली का बिल अधिक आ रहा है।
PPAC यानी पॉवर पर्चेंजिंग एडजेस्टमेंट कॉस्ट एक तरह का सरचार्ज या अधिभार है। जब कंपनियों को निर्धारित रेट से अधिक कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ती है तो कंपनियां इस सरचार्ज को वसूलती हैं। आसान भाषा में समझें तो जब बिजली की कीमत एकाएक बढ़ती है तो इसकी कीमत ग्राहकों से वसूलने के लिए बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां यानी डिस्कॉम बिल में पीपीएसी जोड़ती हैं। अब सवाल है कि डिस्कॉम को महंगी बिजली क्यों सप्लाई हुई तो इसकी वजह ये है कि भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग काफी बढ़ गई तो सप्लॉयर को बिजली बनाने वाली कंपनियों से इसे मंहगे में खरीदना पड़ा। बिजली बनाने वाली कंपनियों को कोयले की महंगाई ने सताया।
कैसे पड़ता है बिल पर फर्क
अब सवाल उठता है कि पीपीएसी में बढ़ोतरी से बिल पर कैसे फर्क पड़ता है। इसे एक कैलकुलेशन से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि आपके घर में 2 किलोवॉट का कनेक्शन है। इस पर 50 रुपये प्रति किलोवॉट के हिसाब से 100 रुपये का फिक्स्ड चार्ज होगा। मान लीजिए कि बिजली की खपत 1 हजार रुपये है तो बिल बना 1100 रुपये। मान लेते हैं कि आपका आवास दिल्ली में ऐसी जगह है जहां टाटा पावर बिजली सप्लाई करती है तो 37.88 फीसदी के हिसाब से 416.88 रुपये का पीपीएसी शुल्क बना। अब इसे जोड़कर बिल बना 1516.88 रुपये। पहले यह पीपीएसी 29.13 फीसदी थी और उसके हिसाब से बिल बनता 1420.76 रुपये।