Cloned Fingerprints Scam: आधार से जुड़ा नया फ्रॉड, फिंगरप्रिंट का क्लोन तैयार कर ठग उड़ा रहे हैं पैसे

Cloned Fingerprints Scam: भारत सरकार की ओर से AePS को साल 2014 में लॉन्च किया गया था। इसे उन लोगों के लिए लॉन्च किया गया था। जिन गांवों में बैंक की शाखाएं बेहद कम है। लेकिन अब यह ठगी करने वालों के लिए एक बड़ा औजार बन गया है। इसके जरिए ठग लोगों को तगड़ा चूना लगा रहे हैं

अपडेटेड Sep 04, 2023 पर 1:31 PM
Cloned Fingerprints Scam: आधार इनेबल्ड पेमेंट सर्विस यानी AePS के जरिए आप अपने अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं

Cloned Fingerprints Scam: आधार कार्ड (Aadhaar Card) से जुड़े नए-नए फ्रॉड इन दिनों चल रहे हैं। अब एक नया घोटाला सामने आया है। जिसमें आधार के फिंगरप्रिंट का क्लोन बनाकर अकाउंट से पैसे उड़ा दिए जाते हैं। इस साल की शुरुआत में, बिहार के नवादा जिले की रहने वाली उर्मिला कुमारी को एक स्कैम में 57,900 रुपये का चूना लग गया। उनकी फिंगरप्रिंट के निशान का क्लोन बनाया गया था। इसके बाद उनके अकाउंट से पैसे निकाले गए। बिहार पुलिस AePS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिए होने वाले फर्जीवाड़े से तंग आ चुकी है।

इस साल जुलाई में, नवादा पुलिस ने इसी तरह की ठगी करने वालों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इसमें पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस गिरोह के पास से 512 क्लोन अंगूठे के निशान बरामद किए हैं। बिहार में इस तरह की ठगी धड़ल्ले से चल रही है। ठग उन लोगों को टारगेट करते हैं, जो कम पढ़े लिखे हैं और बैंकिंग के लिए AePS का इस्तेमाल करते हैं।

जानिए क्या है AePS


आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (Aadhaar Enabled Payments System - AePS) एक बैंक आधारित मॉडल है। जिसमें आधार बेस्ड बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंस के जरिए खातों में ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन किए जाते हैं। इनमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के लाभार्थियों के खाते भी शामिल होते हैं। साल 2014 में इसे केंद्र सरकार की ओर से लॉन्च किया गया था। इसका मकसद है कि जिन गांवों में बैंक की शाखाएं कम हैं। वहां भी लोग पैसों का लेन-देन कर सकें। लेकिन अब यह ठगों के लिए बहुत बड़ा औजार बन गया है। इसमें ठगों को सिर्फ आधार कार्ड नंबर और क्लोन फिंगरप्रिंट की जरूरत होती है। बिहार पुलिस का कहना है कि बहुत से लोग इस धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। इसमें फिंगरप्रिंट का क्लोन तैयार किया जाता है।

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लोन दिलाने और राशन कार्ड बनवाने के नाम पर कर रहे हैं ठगी

पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है। वो लोग गांव में घूम-घूम कर फौरन लोन लेने और राशन कार्ड दिलाने का वादा करते थे। इसके बदले में ग्रामीणों के अंगूठे के निशान ले लिए गए। पुलिस अभी तक उन लोगों की पहचान नहीं कर पाई है। जिन लोगों के इन ठगों ने अंगूठे के निशान लिए हैं। पुलिस का ये भी कहना है कि हमारे पास पर्याप्त सबूत भी नहीं है। हालांकि हम उस जगह का पता कर रहे हैं। जहां से ट्रांजैक्शन किए गए हैं।

इस मामले में जिन लोगों के साथ ठगी की जाती है। उनमें बहुत कम लोग हैं, जो FIR दर्ज कराते हैँ। बहुत कम लोगों के पास मोबाइल फोन है। लिहाजा पैसे निकाले जाने का मैसेज उन्हें नहीं मिल पाता है। जब वो बैंक में जाते हैं। तब पता चलता है कि उनके अकाउंट से पैसे निकाले जा चुके हैं।

डेटा लीक से कैसे बचें?

आधार का डेटा सुरक्षित करने का एक तरीका है। अपना आधार लॉक कर देना चाहिए। लॉक करने के बाद भले ही डेटा लीक हो चुका हो, लेकिन उसका इस्तेमाल पैसे के लेनदेन के लिए नहीं किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर आधार को अनलॉक भी किया जा सकता है। यूजर UIDAI की वेबसाइट या mAdhaar ऐप पर जाकर आधार लॉक कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहला काम है 16 नंबर का वर्चुअल ID जनरेट करना। ये आपके रजिस्टर्ड नंबर पर SMS के जरिए आपको मिल जाएगा। इसके बाद आप आधार लॉक का ऑप्शन चुन सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ एक कैप्चा कोड फिल करना होता है। आधार को जरूरत पड़ने पर दोबारा अनलॉक करने के लिए आपको उसी 16 डिजिट वाले VID नंबर की जरूरत होगी।

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