Credit Score: आमतौर पर जब लोगों को पैसों की अचानक जरूरत पड़ जाती है तो बहुत से लोग क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि लोग लोन कुछ किश्ते (EMI) आसानी से चुका देते हैं। बाद में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे पहले असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। अच्छे क्रेडिट स्कोर दम पर आसानी से लोन मिल सकता है। वहीं कम ब्याज दरों का फायदा भी उठा सकते हैं।
वहीं अगर क्रेडिट स्कोर खराब है तो कोई भी बैंक जल्दी से लोन देने के लिए तैयार नहीं होते हैं। आमतौर पर 750 और उससे ज्यादा स्कोर को बेहतर माना जाता है। यानी आपको लोन या क्रेडिट कार्ड मिलेगा या नहीं। इसका फैसला क्रेडिट स्कोर के आधार पर किया जाता है। ऐसे में क्रेडिट स्कोर का खास तौर से ध्यान देना चाहिए।
ड्यू डेट की तारीख याद रखें
अगर आपने क्रेडिट कार्ड से कोई भी प्रोडक्ट खरीदा है तो उसके पेमेंट की आखिरी तारीख यानी ड्यू डेट जरूर याद रखें। इसकी वजह ये है कि इसमें लापरवाही करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर खराब असर पड़ सकता है।
क्रेडिट लिमिट का रखें ध्यान
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय यह हमेशा ध्यान रखें कि आप अपने कार्ड की अधिकतम सीमा तक लोन न लें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर कम हो जाता है।
क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम रखें
क्रेडिट स्कोर पर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (Credit Utilization Ratio – CUR) का बहुत असर पड़ता है। आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड का कितना इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड कंपनियां क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो को ज्यादा होने पर कर्ज का संकेत मानते हैं। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है और आपने 40,000 रुपये खर्च किया है तो आपकी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो 40 फीसदी का होगा।
सेटलमेंट नहीं लोन को खत्म करें
क्रेडिट स्कोर की हिस्ट्री में भी यह भी देखा जाता है कि पुराने लोन चुकाए हैं या उनका सेटलमेंट किया गया है। सेटलमेंट में लन लेने वाले का जोखिम बढ़ जाता है। जिससे क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ता है।