स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर कई सारी ई-कॉमर्स कंपनियों के द्वारा अपने ग्राहकों को कई सारी बेहद ही आकर्षक डील दी जा रही है। इनमें ग्राहकों को काफी कम दाम पर शॉपिंग करने का मौका मिलेगा। हालांकि इस दौरान आपको ऑनलाइन फ्रॉड से भी सावधान रहना बेहद जरूरी है। दरअसल स्कैमर्स आपको नकली डील के बहाने चूना भी लगा सकते हैं।
एंटरप्राइज-वाइड धोखाधड़ी और जोखिम प्रबंधन समाधान, क्रॉसफ्रॉड में एंटरप्राइज सॉल्यूशंस के हेड, धीरेन वी देधिया, अकेले इस साल व्यापारियों के लिए ई-कॉमर्स धोखाधड़ी लागत में 48 करोड़ डॉलर से ज्यादा के खतरनाक वैश्विक अनुमान पर बात करते है। देधिया ने बताया, "भारत के ई-कॉमर्स बाजार के 2025 तक 1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, तेजी से वृद्धि से धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ गया है। डिजिटल वॉलेट और अभी खरीदें-बाद में भुगतान करें विकल्पों की ओर बदलाव ने धोखेबाजों को नए रास्ते दिए हैं।
बता दें कि इनमें फिशिंग, मैलवेयर और डेटा ब्रीच का खतरा सबसे ज्यादा है। डेटा ब्रीच एक बड़ी चिंता के तौर पर उभरा है। देधिया के मुताबिक क्रेडिट कार्ड डिटेल और पासवर्ड जैसी जानकारियां लीक होने की वजह से क्रेडिट कार्ड से जुड़े फ्रॉड हो सकते हैं। वहीं भारत में ई-कॉमर्स धोखाधड़ी साल 2022 में 5,000 डॉलर से दोगुनी होकर 10,000 डॉलर होने की उम्मीद है। भारत में लगभग 57 फीसदी फ्रॉड सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, इंटरप्राइज और फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए होती है।
वैश्विक विज्ञापन धोखाधड़ी का पता लगाने और रोकथाम करने वाली कंपनी mFilterIt के सह-संस्थापक और CTO धीरज गुप्ता बताते हैं कि कैसे धोखेबाज फेमस ब्रांड्स की नकल करके फिशिंग के लिए यूजर्स के भरोसे का फायदा उठाते हैं। धोखाधड़ी करने वाले लोग अपनी वेबसाइटों पर यूजर्स को आकर्षित करने के लिए नकली कूपन और 'टू गुड टू बी ट्रू डील्स' को बढ़ावा देते हैं। एक बार जब यूजर्स अपनी डिटेल इंटर कर देता है तो वे अक्सर धोखाधड़ी के जाल में फंस जाते हैं। जिसकी वजह से वे एक्सर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं और इन जानकारियों का उपयोग दूसरे गलत कामों में भी हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए केवाईसी जैसे कदम अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि डीपफेक जैसी टेक्नोलॉजी ने धोखाधड़ी को थोड़ा आसान बना दिया है। इससे बचने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का सहारा लिया जा सकता है। इनके जरिए संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है। वहीं mFilterIt के गुप्ता ने शॉपिंग करते वक्त ज्यादा सावधानी बरतने पर जोर दिया। ट्रूकॉलर के मुताबिक शॉपिंग करने के लिए केवल विश्वसनीय और ऑथराइज्ड वेबसाइट का उपयोग करना चाहिए। हालांकि नकली वेबसाइटें भी बिलकुल असली जैसी ही दिखाई देती हैं। पहली नजर में उनको पहचान पाना मुश्किल हो सकता है। इसके लिए सबसे आसान तरीका है URL चेक करना। ऑथराइज्ड वेबसाइटों के यूआरएल में HTTPS लिखा होता है। इसके अलावा कभी भी किसी से अपनी ओटीपी को भी शेयर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपने डेटा को सेव करके नहीं रखना चाहिए।