छोटी बीमारियां और 35,820 करोड़ खर्च, हेल्थ पर ऐसे जेब ढीली करते हैं भारतीय, स्टडी में खुलासा

ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (OPPI) द्वारा एक हेल्थकेयर कम्युनिकेशन फर्म हवास लाइफ सोरेंटो (Havas Life Sorento) के साथ मिलकर किए गए सर्वे में पता चला कि खर्च का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर के पास कंसल्टेंशन फीस के रूप में चला जाता है

अपडेटेड Mar 25, 2022 पर 9:09 PM
स्टडी से पता चला कि दर्द के अलावा खांसी, सर्दी और बुखार जैसे श्वसन रोग सबसे आम थे, जिन पर भारतीय ज्यादा खर्च करते हैं

भारत में फार्मा का एक बड़ा बाजार है, इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि हम भारतीय हर साल 36,000 करोड़ रुपये जैसी भारी भरकम ऐसी बीमारियों पर खर्च कर देते हैं जो “माइनर” (minor) कैटेगरी में आती हैं यानी छोटी-मोटी बीमारियां। अपनी तरह के पहले ओवर-द-काउंटर (OTC) ड्रग्स से जुड़े सर्वे में यह खुलासा हुआ हुआ है। “माइनर” कैटेगरी में 27 बीमारियां आती हैं।

ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (OPPI) द्वारा एक हेल्थकेयर कम्युनिकेशन फर्म हवास लाइफ सोरेंटो (Havas Life Sorento) के साथ मिलकर किए गए सर्वे में पता चला कि खर्च का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर के पास कंसल्टेंशन फीस के रूप में चला जाता है।

सर्वे के निष्कर्षों को देखकर फार्मा कंपनियां भारत में एक मजबूत OTC ड्रग पॉलिसी पर जोर देने के लिए आगे आ सकती हैं, जिससे खुद उपचार को बढ़ावा मिले और मामूली बीमारियों के लिए डॉक्टर्स पर निर्भरता कम हो।


खुद उपचार की नीति की जरूरत

self-medication policy : 2020-21 में हुआ यह सर्वे में 25 शहरों के 9,797 प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित था, जहां 12 वर्ष से ज्यादा उम्र के 12.3 करोड़ की आबादी रहती है।

इस स्टडी की अगुआई करने वाली हवास लाइफ सोरेंटो की मैनेजिंग पार्टनर सुजन जोशी ने 24 मार्च को OPPI एनुअल समिट के दौरान कहा कि इसके रिजल्ट्स को देश में एक मजबूत और जिम्मेदार सेल्फ मेडिकेशन पॉलिसी की वकालत में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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OPPI के प्रेसिडेंट और फाइजर इंडिया के एमडी एस श्रीधर ने स्टडी रिपोर्ट में कहा, “निष्कर्षों से संकेत मिलते हैं कि कंज्यूमर व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने और छोटी बीमारियों के उपचार को सेल्फ मेडिकेशन में लाकर हेल्थकेयर खर्च बढ़ाने में मदद मिलने की खासी संभावनाएं हैं।”

सांस की बीमारियों और दर्द हैं आम बीमारियां

स्टडी से पता चलता है कि दर्द के अलावा खांसी, सर्दी और बुखार जैसे श्वसन रोग सबसे आम थे, उसके बाद पेट दर्द, अपच, एसिडिटी और कब्ज जैसी गैस्ट्रॉइंटेस्टिनल बीमारियां (gastrointestinal ailments) नंबर आता है।

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उपचार में होने वाले खर्च को देखें तो उपचार के तरीके, डॉक्टर के परामर्श, सेल्फ मेडिकेशन या फार्मेसिस्ट की सलाह को छोड़ दें तो प्रति व्यक्ति औसत खर्च 796 रुपये आता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब इसे 12.3 करोड़ उपभोक्ताओं पर गणना करें तो प्रत्येक बीमारी के एक साल में औसतन 3.66 बार होने की संभावना के साथ 27 मामूली बीमारियों पर सालाना 35,820 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं।

स्टडी ने कहा, “अगर जेब से इस रकम के खर्च होने के फैक्ट को देखें तो यह आबादी पर एक बड़ा बोझ है।”

डॉक्टरों की जेब में जाता है बड़ा हिस्सा

हेल्थकेयर प्रोफेशनल संबंधित (HCP) खर्च को देखें को इसकी कुल हेल्थकेयर खर्च का 30,730 करोड़ रुपये यानी 86 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि सेल्फ मेडिकेशन की सिर्फ 10 फीसदी है।

एचसीबी खर्च में 11,623 करोड़ रुपये दवाओं की लागत और 9,710 करोड़ रुपये डॉक्टर की फीस, 4,035 करोड़ रुपये जांच और 5,358 करोड़ रुपये ट्रांसपोर्टेशन और प्रोडक्टिविटी पर खर्च होते हैं।

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