Pension News: इमरजेंसी के दौरान जेल गए लोगों को हर महीने मिलेंगे 10,000 रुपये, सरकारी बसों में कर सकेंगे मुफ्त यात्रा

West Bengal Pension News: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन 325 लोगों के लिए ₹10,000 की मासिक पेंशन की घोषणा की है, जिन्हें इमरजेंसी के दौरान विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण जेल भेजा गया था। राज्य सचिवालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा कि 1975 में इन लोगों ने इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए कई कठिनाइयां झेली थीं

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 12:17 PM
West Bengal Pension News: पश्चिम बंगाल में इमरजेंसी के दौरान जेल गए लोगों को हर महीने 10,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी

West Bengal Pension News: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आपातकाल यानी इमरजेंसी के दौरान जेल गए 325 लोगों के लिए 10,000 रुपये की मासिक पेंशन, सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और मेडिकल सहायता की घोषणा की है। राज्य सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु ने कहा कि इन लोगों ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक कष्ट सहे थे। उन्होंने कहा, "इन वीर सेनानियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। राज्य की नई सरकार इन वीर सेनानियों के आदर्शों पर ही आधारित है।"

मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने आपातकाल के दौरान विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण जेल भेजे गए 325 लोगों को 'पश्चिमबंग लोकतंत्र सेनानी सम्मान' के लिए चयन किया है। उन्होंने बताया कि बंगाल सरकार द्वारा चिन्हित किए गए इन 325 लोगों में से प्रत्येक को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी। साथ ही वे सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा के हकदार भी होंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए उन्हें 1,000 रुपये की मासिक मेडिकल सहायता भी दी जाएगी।

बीजेपी मनाती है 'संविधान हत्या दिवस' 


अधिकारी ने कहा कि यदि किसी लाभार्थी का निधन हो चुका है, तो उक्त लाभ उनके जीवनसाथी को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों के मूल्यों और सिद्धांतों पर बनी है। केंद्र की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार 1975 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की याद में हर साल 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के तौर पर मनाती है।

लोगों को पुरस्कार और पेंशन देकर सम्मानित किया

BJP शासित कई राज्यों ने भी आपातकाल का विरोध करने की वजह से जेल गए लोगों को पुरस्कार और पेंशन देकर सम्मानित किया है। इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई है।

स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद

इससे पहले अधिकारी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ पर उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी जान कुर्बान कर दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के नारे को याद करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आजाद भारत के सपने के साथ हजारों भारतीयों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, "9 अगस्त के इस अहम दिन पर मैं उन सभी बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अपना गहरा आभार और सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनकी बेमिसाल वीरता और सर्वोच्च बलिदान ही उस आजाद भारत की नींव है जिसे हम आज संजोते हैं।"

भारत में इमरजेंसी (आपातकाल) 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीनों तक लगा था। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद ने भारतीय संविधान के आर्टिकल 352 के तहत देश में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।

इमरजेंसी लागू होने के प्रमुख कारण

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला: 12 जून 1975 को जस्टिस जगमोहनलाल सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी के 1971 के रायबरेली चुनाव को रद्द कर दिया। साथ ही चुनावी धांधली का दोषी मानते हुए उन पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी।

जयप्रकाश नारायण (JP) का आंदोलन: इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग को लेकर जेपी के नेतृत्व में देश भर में व्यापक जन आंदोलन (संपूर्ण क्रांति) चल रहा था। 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली में पुलिस और सेना से असंवैधानिक आदेशों का पालन न करने का आह्वान किया गया।

आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता: 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गुजरात व बिहार में छात्र आंदोलनों के कारण राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण था।

इमरजेंसी के दौरान प्रमुख घटनाएं और प्रभाव

मौलिक अधिकार निलंबित: नागरिकों के संविधान प्रदत्त मूल अधिकार (जैसे अभिव्यक्ति की आजादी और बिना हथियार शांतिपूर्ण एकत्र होने का अधिकार) छीन लिए गए।

विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां: अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और बीजू पटनायक जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया।

प्रेस पर सेंसरशिप: समाचार पत्रों और मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप लगा दी गई। अखबारों को छपने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी।

संविधान संशोधन: 42वें संविधान संशोधन द्वारा सरकार ने संसद और प्रधानमंत्री के अधिकारों को अत्यधिक बढ़ा दिया और न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित कर दिया।

संजय गांधी के विवादित कार्यक्रम: इस दौरान जबरन नसबंदी (परिवार नियोजन) अभियान और दिल्ली में झुग्गियों को हटाने का काम बड़े पैमाने पर चलाया गया, जिसको लेकर व्यापक जन असंतोष पैदा हुआ।

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इमरजेंसी का अंत और चुनावों की घोषणा

जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने अचानक मार्च में लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा की और राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया गया। 21 मार्च 1977 को आधिकारिक तौर पर आपातकाल समाप्त हुआ। इसके बाद मार्च 1977 के चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की करारी हार हुई। इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी दोनों चुनाव हार गए। इस चुनाव में जनता पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और मोरारजी देसाई भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।

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