9 रुपये प्रति लीटर बढ़ेगी पेट्रोल और डीजल की कीमत, चुनावों के बाद होगा इजाफा?

देश के 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव अगले हफ्ते में खत्म होने वाले हैं, जिसके बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है

अपडेटेड Mar 03, 2022 पर 8:29 AM
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9 रुपये प्रति लीटर बढ़ेगी पेट्रोल और डीजल की कीमत, चुनावों के बाद होगा इजाफा?

देश के 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव अगले हफ्ते में खत्म होने वाले हैं, जिसके बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है।  जेपी मॉर्गन (JP Morgan) की रिपोर्ट के मुताबिक ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल पर और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर तक कीमत बढ़ा सकती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुकी है जिसका असर घरेलू बाजार पर भी नजर आएगा।

नवंबर से नहीं बढ़ी पेट्रोल और डीजल की कीमत

अभी पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नवंबर से कोई बदलाव नहीं किया गया है। हमारा अनुमान है कि स्पॉट ब्रेंट (105/बीबीएल डॉलर) और डीजल की कीमतों पर तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को 5.7 रुपये प्रति लीटर और सामान्य मार्जिन पर 2.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। हम निवेशकों को सावधान करेंगे कि कच्चे तेल, डीजल और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, ये संख्या बदल सकती है। अब रेट्स में रोजाना बदलाव नजर आएगा।


कच्चे तेल की बढ़ रही है कीमत

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 2014 के मध्य के बाद पहली बार 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर उठीं हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी क्राइसिस के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। ऑयल और गैस की दिग्गज कंपनी रूस से आती हैं जिसका असर सप्लाई में देखने को मिलेगा और कीमतों पर नजर आएगा।

बढ़ रहा है कंपनियों का खर्च

ऑयल मिनिस्ट्री के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की जानकारी के मुताबिक भारत में कच्चे तेल की खरीदारी 1 मार्च को 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई, जो अगस्त 2014 के बाद सबसे ज्यादा है।

चुनावों के बाद बढ़ेगी कीमत

उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए सातवें और अंतिम चरण का मतदान 7 फरवरी को है और मतों की गिनती 10 मार्च को होनी है।

9 रुपये तक बढ़ सकती है कीमत

रिपोर्ट में कहा है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को सामान्य मार्केटिंग मार्जिन पर वापस जाने के लिए रिटेल कीमतों में 9 रुपये प्रति लीटर या 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है। घरेलू ईंधन की कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों से जुड़ी हैं क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है। इसमें लगातार 118 दिनों तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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