New Labour codes: नए श्रम संहिता के लागू होने पर काम के घंटों से लेकर हाथ के वेतन तक, नौकरी, काम के घंटे और वर्क कल्चर में बदलाव आएगा। कल 1 जुलाई से वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति (OSH) पर चार व्यापक कोड राष्ट्रपति की सहमति के बाद पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं। लेकिन इन चार संहिताओं को लागू करने के लिए नियमों को अधिसूचित करने की आवश्यकता है। ऐसा माना जा रहा है कि ये कल 1 जुलाई से लागू हो सकते हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से इस पर बयान नहीं आया है।
1. काम के घंटे: ऑफिसों में नियमित काम का समय एक दिन में 9 घंटे की जगह 12 घंटे हो सकते हैं। यदि कोई कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट का ऑप्शन चुनने का निर्णय करती है, तो हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का विकल्प कर्मचारियों को देना होगा। सप्ताह में कुल काम के घंटे 48 रहेंगे।
2. छुट्टियां: पहले लेबर कानूनों में छुट्टी मांगने के लिए एक साल में कम से कम 240 दिन काम करना जरूरी होता था लेकिन अब इसे घटाकर 180 कर दिया गया है।
3. बढ़ जाएगा PF में योगदान: कर्मचारियों और नियोक्ता के पीएफ योगदान के बढ़ने से टेक-होम वेतन यानी हाथ आने वाली सैलरी कम हो जाएगी। PF में योगदान बढ़ बेसिक सैलरी का 50 फीसदी हो जाएगा।
4. बढ़ सकती हैं अर्जित छुट्टिया:1 जुलाई से सरकरी कर्मचारियों को अर्जित छुट्टियों (Earned Leaves) की बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। मोदी सरकार लेबर कोड के नियमों को लागू करती है तो कर्मचारियों की अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) बढ़कर 300 से लेकर 450 तक हो सकती हैं।
चारों लेबर कोड नियमों के लागू होने से देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के मौके बढ़ेंगे। लेबर कानून देश के सविंधान का अहम हिस्सा है। अभी तक 23 राज्यों ने लेबर कोड नियम के रूल्स बना लिए हैं।
क्या है लेबर कोड के नियम – 4 कोड में बंटा है कानून
भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड शामिल है। अभी तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कानूनों को तैयार कर लिया है। संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम राज्यों में लागू हो पाएंगे।