Home Loan: सिर्फ सस्ते घर नहीं, आसान होम लोन भी जरूरी; एक्सपर्ट बोले- तभी बढ़ेगा हाउसिंग सेक्टर

Home Loan: क्या सिर्फ सस्ते घर बना देने से हर परिवार का अपना आशियाना हो जाएगा? असली चुनौती आसान होम लोन की है। जानिए क्यों एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आसान क्रेडिट एक्सेस ही भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ का आधार बनेगा।

अपडेटेड Jul 16, 2026 पर 10:31 PM
CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है।

Home Loan: भारत में घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज मंजूरियों पर अक्सर चर्चा होती है। लेकिन इन सबसे पहले एक सवाल आता है। क्या आम परिवार के पास घर खरीदने के लिए आसान और समय पर लोन उपलब्ध है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।

होम लोन सिर्फ फाइनेंशियल प्रोडक्ट भर नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। यह आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा देता है। लेकिन यह सपना तभी पूरा होता है, जब सही समय पर लोन मिल सके। इसलिए हाउसिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मकानों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों तक क्रेडिट की पहुंच है।

तेजी से बढ़ सकता है होम लोन बाजार


CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है। FY25 से FY30 के बीच इसके 15-16% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। इस रफ्तार से बाजार का आकार ₹77 लाख करोड़ से ₹81 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

हालांकि, यह ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट कर्मचारियों से नहीं आएगी। अगली बड़ी मांग छोटे शहरों, स्वरोजगार करने वालों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों से आने की उम्मीद है, जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं।

असली चुनौती लोन तक पहुंच

देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता है। लेकिन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में उन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वजह साफ है। बैंक लंबे समय तक सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और स्थायी नौकरी को ही सबसे बड़ा आधार मानते रहे हैं।

इस कारण छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग लोन से वंचित रह जाते हैं। जबकि उनकी आय और भुगतान क्षमता मजबूत हो सकती है।

AI और डिजिटल डेटा बदल रहे हैं तस्वीर

अब लोन देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। फाइनेंस कंपनियां और बैंक डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भुगतान क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि ग्राहक के फाइनेंशियल व्यवहार और लेनदेन का भी आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जिन लोगों के लिए लोन लेना मुश्किल था, उनके लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा भी जरूरी

डिजिटल प्रक्रिया ने लोन लेना आसान बनाया है। फिर भी पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। दस्तावेज, नियम, EMI और दूसरी शर्तें कई बार लोगों को उलझन में डाल देती हैं।

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ भरोसेमंद सलाहकारों की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। सही सलाह मिलने से ग्राहक बेहतर फैसला ले पाते हैं और पूरे लोन प्रोसेस को आसानी से समझते हैं।

सफलता का असली पैमाना क्या?

हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितना लोन बांटा गया। असली सफलता इस बात में होगी कि कितने नए परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पाए।

जब ज्यादा लोगों तक आसान होम लोन पहुंचेगा, तो इसका फायदा सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रियल एस्टेट, निर्माण, रोजगार और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि आसान और समावेशी क्रेडिट एक्सेस को भारत की अगली हाउसिंग ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।

(यह आर्टिकल मनीकंट्रोल हिंदी के लिए अतुल मोंगा ने लिखा है, जो बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ हैं)

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