अगस्त में खुदरा महंगाई में हो सकती है बढ़त, जुलाई के IIP आंकड़े रह सकते हैं कमजोर: मनीकंट्रोल पोल

अगस्त महीने में तुअर दाल में महीने दर आधार पर 4.8 फीसदी और उड़द दाल की कीमत में 2.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है

अपडेटेड Sep 09, 2022 पर 4:32 PM
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Barclays के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट राहुल बाजोरिया का कहना है कि इस साल बुआई एरिया कम होने और बफर स्टॉक घटने के साथ ही खाद्यानों और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है

मनीकंट्रोल की तरफ से 18 अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए पोल से निकलकर आया है कि अगस्त महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर 4 महीने में पहली बार बढ़त दर्ज करते हुए 6.9 फीसदी पर जाती नजर आ सकती है। बता दें कि जुलाई महीने में खुदरा महंगाई (CPI) 6.71 फीसदी के 5 महीने के निचले स्तर पर थी। बता दें कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय 12 सितंबर को शाम 5.30 बजे अगस्त महीने के खुदरा महंगाई आंकड़े जारी करेगा।

इस पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगस्त महीने में खुदरा महंगाई में खाने -पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तेजी आएगी। उनका यह भी मानना है कि खाने -पीने की चीजों में आई महंगाई की तुलना में दूसरी चीजों की कीमतों में आई गिरावट कम रही है। जिसका असर खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा।

Barclays के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट राहुल बाजोरिया का कहना है कि इस साल बुआई एरिया कम होने और बफर स्टॉक घटने के साथ ही खाद्यानों और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने आगे की स्थिति का अंदाजा लगते हुए खाने-पीने की कुछ चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में फूड प्राइस में बढ़त का असर भारत में भी जरूर दिखेगा। बाजोरिया का अनुमान है कि अगस्त महीने में खाने-पीने की खुदरा महंगाई दर जुलाई के 6.7 फीसदी से बढ़कर 7.2 फीसदी पर आ सकती है।


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उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में महीने दर महीने आधार पर चावल की कीमत में 2.3 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। जबकि इसी अवधि में आटे की कीमत में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। अगस्त में महीने दर महीने आधार पर दालों की कीमतों मे भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि चना दाल में कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं मूंग और मसूर दाल की कीमत में महीने दर महीने आधार पर 0.2 फीसदी और 0.7 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। अगस्त महीने में सबसे ज्यादा बढ़त तुअर दाल में देखने को मिली है। अगस्त महीने में तुअर दाल में महीने दर आधार पर 4.8 फीसदी और उड़द दाल की कीमत में 2.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है।

अच्छी बात यह है कि अगस्त महीने में 6 खाद्य तेलों के भाव में जुलाई के तुलना में 0.4 फीसदी से लेक 3.7 फीसदी तक की गिरावट आई है। वहीं सब्जियों के भाव मिलेजुले रहे हैं। जहां प्याज और आलू की कीमतें 0.7 फीसदी और 3.5 फीसदी बढ़ी हैं वहीं टमाटर की कीमतों में महीने दर महीने आधार पर 13.6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। ये आंकड़े उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की तरफ से उपलब्ध कराए गए हैं।

अगस्त महीने में खुदरा महंगाई के 6.9 फीसदी पर रहने की उम्मीद है जो कि आरबीआई के भारत के लिए तय किए गए 4 फीसदी के मीडियम टर्म टारगेट से लगातार 35 वें महीने अधिक रहेगा। इसके अलावा यह लगातार 8वें महीने आरबीआई के 2-6 फीसदी के टॉलरेंस लिमिट से ज्यादा रहेगा। अगर आरबीआई लगातार 3 तिमाहियों में महंगाई को नियंत्रण में लाने में सफल नहीं रहता है तो उसको केंद्र सरकार को अपनी असफलता की वजह बतानी होगी और ये भी बताना होगा कि महंगाई कम करने के लिए और कौन से दूसरे कदम उठाने चाहिए।

बता दें कि महंगाई की नकेल कसने के लिए आरबीआई पिछले 4 महीने में अपने रेपो रेट में 1.40 फीसदी की बढ़त कर चुका है। आरबीआई की अगली पॉलिसी मीट 28-30 सितंबर के बीच होगी। अर्थशास्त्रिों का मानना है कि इस बैठक में आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

IIP ग्रोथ

बता दें कि सांख्यिकी मंत्रालय IIP ग्रोथ के आंकड़े 12 सितंबर को शाम को 5.30 बजे जारी करेगा। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के जरिए मापी जाने वाली इंडस्ट्रियल ग्रोथ के भी जुलाई महीने में जून के 12.3 फीसदी से घटकर 4.1 फीसदी पर आने का अनुमान लगाया गया है।

मनीकंट्रोल द्वारा 16 अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए पोल से यह निकलकर आया है कि जुलाई में देश की IIP घटकर 4.1 फीसदी पर आ सकती है। बता दें क जून महीने में भी IIP में महीने दर महीने आधार पर गिरावट देखने को मिली थी। जून की आईआईपी मई के 19.6 फीसदी से घटकर 12.3 फीसदी पर आई थी।

बता दें कि आईआईपी में मई और जून में प्रतिशत के आधार पर दिखी बड़ी बढत में छोटे बेस का सबसे बड़ा योगदान था। गौरतलब है कि कोविड -19 के कारण पिछले 2 साल में उत्पादन गतिविधियां काफी ज्यादा प्रभावित रही थी।

पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जुलाई महीने में माइनिंग गतिविधियों पर मानसून की वजह से सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि इस अवधि में घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है लेकिन एक्सटर्नल डिमांड में कमजोरी की वजह से एक्सपोर्ट के आंकड़ों में कमजोरी रहेगी।

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