Tomato Price Hike: इतने दिनों बाद भी क्यों नीचे नहीं आ रही टमाटर की कीमत, क्या है इसके पीछे का कारण?

Tomato Price Hike: दिल्ली-NCR रीजन समेत कई बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर सब्जी उपलब्ध कराने के लिए पिछले महीने सरकार के हस्तक्षेप के बाद भी टमाटर की कीमत बढ़ती जा रही है। जबकि जुलाई में रेट 200 रुपए प्रति किलोग्राम से ज्यादा रहा और फिलहाल भी उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमतों से तत्काल कोई राहत मिलने की संभावना नहीं दिख रही है

अपडेटेड Aug 06, 2023 पर 8:35 PM
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Tomato Price Hike: इतने दिनों बाद भी क्यों नीचे नहीं आ रही टमाटर की कीमत

Tomato Price Hike: देश भर में टमाटर की कीमतें (Tomato Price) एक महीने से ज्यादा समय से ऊंची बनी हुई हैं, क्योंकि देश के कई हिस्सों में सब्जी की खुदरा कीमत 200 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर बनी हुई है। थोड़ी राहत के बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में लोग सब्जी खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं। दिल्ली-NCR रीजन समेत कई बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर सब्जी उपलब्ध कराने के लिए पिछले महीने सरकार के हस्तक्षेप के बाद भी टमाटर की कीमत बढ़ती जा रही है। जबकि जुलाई में रेट 200 रुपए प्रति किलोग्राम से ज्यादा रहा और फिलहाल भी उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमतों से तत्काल कोई राहत मिलने की संभावना नहीं दिख रही है।

थोक व्यापारियों के मुताबिक, टमाटर इस समय 200 रुपए प्रति किलो से ज्यादा की दर पर बिक रहा है और आने वाले दिनों में इसकी कीमतें 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना है।

दिल्ली में पिछले सोमवार को कीमतें 173 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। हालांकि, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की तरफ से रखे गए आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को टमाटर की खुदरा कीमत 203 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।


इस बीच, मदर डेयरी के सफल रिटेल स्टोर पर टमाटर की कीमत 259 रुपए प्रति किलोग्राम थी। मुंबई में सब्जी की कीमत 157 रुपए प्रति किलो थी।

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में टमाटर की कीमतें देश भर में सबसे ज्यादा 257 रुपए प्रति किलोग्राम थीं। Firstpost के मुताबिक, बुधवार को भाव 263 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया था।

दक्षिण और मध्य भारत में भी, बारिश के कारण टमाटर की कीमतें बिगड़ हैं। ऐसे में कर्नाटक और महाराष्ट्र में बेहतर किस्मों के लिए थोक दरें 180-200 रुपए प्रति किलोग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।

क्यों बढ़ रही है टमाटर की कीमते?

Indian Express की एक रिपोर्ट में कहा गया, टमाटर की ऊंची कीमतों का पता अप्रैल और मई में उनकी कम कीमतों से लगाया जा सकता है, जिसके कारण कई किसानों ने फसल छोड़ दी। इसके अलावा, मार्च और अप्रैल की असामान्य गर्मी में कीटों के हमले भी देखे गए, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

महाराष्ट्र में, जो किसान टमाटर लगभग 10-12 रुपए प्रति किलोग्राम बेचते थे, उन्हें 5 रुपए प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर बेचना पड़ा। इसलिए, किसानों ने अपनी कृषि भूमि पर टमाटर के बजाय दूसरी फसलें उगाईं, जिससे पूरी सप्लाई प्रभावित हुई।

सब्जियों की कीमतें भी ऊंची हो गई हैं, क्योंकि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण पैदा हुई रुकावट के कारण उनकी सप्लाई पिछले एक महीने से ज्यादा समय से दबाव में है। कीमतों में उछाल के पीछे सप्लाई चेन में रुकावट, जलवायु परिस्थितियों और बाजार की दूसरी गतिविधियों समेत अलग-अलग कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

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कृषि उपज विपणन समिति (APMC) के सदस्य कौशिक ने कहा कि सब्जी के थोक विक्रेताओं को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि टमाटर, शिमला मिर्च और दूसरी मौसमी सब्जियों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि थोक बाजार में टमाटर की कीमतें 160 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 220 रुपए प्रति किलो हो गई हैं, जिसके कारण खुदरा कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

आजादपुर मंडी के एक थोक व्यापारी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और भारी बारिश के कारण टमाटर के ट्रांसपोर्टेशन में काफी दिक्कत आ रही है।

थोक विक्रेता ने कहा, "उत्पादकों से सब्जियों के निर्यात में सामान्य से 6 से 8 घंटे ज्यादा लग रहे हैं, जिसके कारण टमाटर की कीमत लगभग 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।" हिमाचल प्रदेश में जुलाई में भारी बारिश हुई है, जिससे फसलों को नुकसान हुआ है।

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में, बढ़ती दरों को मानसून की देर से शुरुआत के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और फसल के महीनों के दौरान बेमौसम बारिश और बाढ़।

कब होगा स्थिति में सुधार?

आजादपुर टमाटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कौशिक के अनुसार, अगले दस दिनों में स्थिति में सुधार हो सकता है, जहां उपभोक्ताओं को आसमान छूती कीमतों से कुछ राहत मिल सकती है।

अगले दो हफ्ते में अहमदाबाद में टमाटर की थोक कीमतें गिरने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रमुख खाद्य पदार्थों की सप्लाई में रुकावट के कारण उपभोक्ताओं को कम से कम सितंबर तक किराना की ज्यादा कीमतों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

इसके अलावा, किसान खरीफ टमाटर की बुआई शुरू करेंगे, जिसकी रोपाई मानसून के फिर से सक्रिय होने के बाद शुरू होगी। महाराष्ट्र के टमाटर उत्पादक अजीत कोर्डे ने कथित तौर पर कहा, "अगस्त के बाद ही आवक में सुधार होगा और खुदरा कीमतों में कोई सुधार देखा जा सकता है।"

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