बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने 25 मार्च को अवंता ग्रुप (Avantha Group) के प्रमोटर और अवंता रियल्टी (Avantha Realty) के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष गौतम थापर (Gautam Thapar) को रियल्टी कंपनी के साथ 307 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े यस बैंक (Yes Bank) धोखाधड़ी मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई (Justice Anuja Prabhudessai) की एकल पीठ ने थापर को दो लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी।
सीबीआई ने थापर, यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर (Yes Bank Founder Rana Kapoor) और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम (पीसीए) की धारा 7, 11 और 12 के तहत मामला दर्ज किया था।। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी कपूर ने अवंता की दिल्ली में एक प्राइम लोकेशन पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदी थी। आरोप यह था कि कपूर ने अवंता के साथ लोन के रूप में आधिकारिक लेन-देन किया था।
सीबीआई (CBI) का आरोप है कि थापर ने धोखाधड़ी के मकसद से कपूर के साथ आपराधिक साजिश रची थी। CBI ने 8 अक्टूबर, 2021 को चार्जशीट दाखिल की थी। थापर को ईडी (ED) ने सीबीआई जांच के आधार पर उनके द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
थापर के वकील महेश जेठमलानी (Mahesh Jethmalani) ने करंजावाला एंड कंपनी फर्म (Karanjawala and Co firm) के साथ दलील दी कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जब भी थापर को बुलाया गया वे जांच और पूछताछ के लिए हाजिर रहे।
सीबीआई के वकील हितेन वेनेगावकर (Hiten Venegaokar) ने तर्क दिया कि थापर ने सह-आरोपी राणा कपूर और उनकी पत्नी बिंदू कपूर के साथ मिलकर विभिन्न वित्तीय लेनदेन में आपराधिक साजिश रची और धोखाधड़ी की। यस बैंक ने पहले ही विभिन्न अवंता कंपनियों को लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लोन सुविधा प्रदान की थी और फिर भी 400 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था।