क्रेडिट कार्ड्स पर बैंक कई तरह के रिवॉर्डस ऑफर करते हैं। यह कैशबैंक, एयर माइल्स या लॉयल्टी प्वाइंट्स के रूप में हो सकता है। ग्राहक ऐसे रिवॉर्ड का फायदा उठाते हैं। सवाल है कि ऐसे रिवॉर्ड्स को लेकर टैक्स के नियम क्या हैं? क्या इन पर टैक्स लगता है? इस बारे में तब चर्चा हो रही है, जब इनकम टैक्स का नया एक्ट और नए रूल्स लागू हो गए हैं।
कुछ स्थितियों में स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रेडिट काड्स पर ऑफर किए जाने वाले ज्यादातर रिवॉर्ड्स पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, कुछ स्थितियों में टैक्स अथॉरिटीज की स्क्रूटनी का सामना कार्डहोल्डर्स को करना पड़ सकता है। आखिर ये स्थितियां क्या है?
ज्यादातर कार्ड्स बेनेफिट्स टैक्सेबल इनकम के दायरे में नहीं आते
लाइवमिंट ने निशांत शंकर के हवाले से बताया है कि ज्यादातर क्रेडिट कार्ड्स बेनेफिट्स को टैक्सेबल इनकम नहीं माना जाता है। शंकर एक इंडिपेंडेंट टैक्स एक्सपर्ट हैं। उनका मानना है कि ऐसे रिवॉर्ड्स आम तौर पर खर्च से लिंक्ड होते हैं। इन्हें अर्निंग्स की जगह रिबेट या डिस्काउंट माना जाता है।
रिवॉर्ड्स के स्ट्रक्चर या इस्तेमाल के तरीके से पड़ सकता है फर्क
उनका मानना है कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में ऐसे रिवॉर्ड्स पर टैक्स के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। ऐसे में उनका क्लासिफिकेशन टैक्स के व्यापक सिद्धांत पर निर्भर करता है। यहां यह सवाल अहम है कि यह बेनेफिट्स सीधे खर्च से जुड़ा है या इसका स्वतंत्र वजूद है। टैक्स के नियम इस बात से बदल सकते हैं कि ऐसे रिवॉर्ड्स को किस तरह स्ट्रक्चर किया गया है या उनका इस्तेमाल किया गया है।
शंकर का कहना है कि टैक्स निम्न स्थितियों में लागू हो सकता है:
-रिवॉर्ड एक्चुअल स्पेंडिंग से लिंक्ड नहीं है
-इसे कैश या कैश इक्विवैलेंट्स में कनवर्ट किया जाता है
-यह बिजनेस या एंप्लॉयमेंट रिलेटेड ट्रांजेक्शन से आता है
ऐसे मामलों में बेनेफिट्स का स्वरूप इनकम का हो जाता है, जिससे उस पर टैक्स लग सकता है। सवाल है कि टैक्स के लिए क्या रिवॉर्ड्स की कोई लिमिट तय है? टैक्स एक्सपर्ट सिद्धार्थ मौर्य का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट में इसके लिए कोई लिमिट तय नहीं है। लेकिन, यहां एक बात ध्यान में रखना जरूरी है। अगर रिवॉर्ड्स 'गिफ्ट' की कैटेगरी में आता है और उसकी वैल्यू 50,000 रुपये से ज्यादा है तो उस पर 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' के तहत टैक्स लग सकता है।
ज्यादातर टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैशबैक या प्वाइंट्स जैसे रूटीन रिवॉर्ड्स को इनकम टैक्स रिटर्न में डिसक्लोज करना जरूरी नहीं है। लेकिन, अगर रिवॉर्ड्स की वैल्यू बहुत ज्यादा है, अगर उन्हें कैश में कनवर्ट किया जाता है या रिवॉर्ड्स बिजनेस से संबंधित खर्च से आता है तो उसके बारे में इनकम टैक्स रिटर्न में बताया जा सकता है। इससे टैक्सपेयर्स को भविष्य में टैक्स अथॉरिटीज की किसी तरह की स्क्रूटनी का सामना नहीं करना पड़ेगा।