भले ही आपकी सैलरी अभी लाखों में हो। लेकिन आगे चलकर पेंशन एक बड़ा सहारा होता है। यही वजह है कि उम्र के एक पड़ाव के बाद अक्सर पेंशन की टेंशन सताने लगती है। हर कोई ज्यादा से ज्यादा पेंशन पाना चाहता है। आज हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद कई लोगों के लिए पेंशन की टेंशन बढ़ गई है तो कई लोगों की पेंशन की टेंशन घट गई है। अगर आप ज्यादा पेंशन पाना चाहते हैं तो आपकी मंथली बेसिक सैलेरी 15000 रु से ज्यादा तो होनी ही चाहिए। साथ में कई सारी शर्तें भी आपको पूरी करनी होंगी। सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद आपको क्या करना चाहिए ये बताने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय के साथ हैं खेतान एंड कंपनी के पार्टनर अंशुल प्रकाश।
ज्यादा पेंशन का हकदार कौन?
अगर आप ज्यादा पेंशन पाना चाहते हैं तो आपकी मंथली बेसिक सैलेरी 15000 रु से ज्यादा तो होनी ही चाहिए। साथ में कई सारी शर्तें भी आपको पूरी करनी होंगी। इसके लिए पहली शर्त ये है कि आपको 1 सितंबर 2014 तक EPF का मेंबर होना चाहिए। ज्यादा पेंशन के लिए EPS में किए गए बदलाव पर सहमति भी जरूरी है। अगर अभी तक सहमति नहीं दी है तो इसके लिए 4 महीने का वक्त मिला है। इसके लिए एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर को EPFO में ज्वॉइंट डिक्लेयरेशन देना होगा। EPFO में ज्वॉइंट डिक्लेयरेशन देने की आखिरी तारीख 3 मार्च 2023 है। पेंशन का ये निर्णय ऑप्शनल है। कोई चाहे तो इस स्कीम से बाहर रह सकता है।
ज्यादा पेंशन के लिए ज्यादा कंट्रीब्यूशन ?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब एम्प्लॉय को क्या कदम उठाना चाहिए? इस सवाल का जवाब देते हुए अंशुल प्रकाश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1.16 फीसदी से ज्यादा कंट्रीब्यूशन को गैरकानूनी ठहराया है। EPS में संशोधन के तहत ज्यादा कंट्रीब्यूशन का प्रावधान था। अब 15000 रुपए प्रति माह से ज्यादा बेसिक सैलरी होने पर ही ज्यादा कंट्रीब्यूशन किया जा सकेगा। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले के इस हिस्से को अभी मुल्तवी रखा है। EPFO को 6 महीने में जरूरी फैसला लेने को कहा है। EPFO पेंशन के लिए फंड का विकल्प खोजने के लिए कहा गया है।
जिन लोगों ने ज्यादा कंट्रीब्य़ूशन दे दिया है उनका क्या?
जिन लोगों ने ज्यादा कंट्रीब्य़ूशन दे दिया है और 1 सितंबर 2014 से पहले रिटायर हो चुके हैं तो EPS की नई स्कीम को स्वीकार करने वाले ज्यादा पेंशन के हकदार होंगे। जिन्होंने रिटायरमेंट से पहले नई स्कीम को नहीं स्वीकार किया है। उन्हें फायदा नहीं होगा। बाद में रिटायर होनेवालों पर गाइडलाइंस से और सफाई आएगी। 3 जनवरी 2023 तक EPFO को गाइडलाइंस लाने का निर्देश दिया गया है।
जिन कंपनियों के अपने PF ट्रस्ट हैं उनका क्या?
अगर कंपनियों के अपने पीएफ ट्रस्ट हैं लेकिन पीएफ कंट्रीब्यूशन EPFO में जाता है तो ऐसे संस्थानों को भी EPS में बदलाव लागू करना होगा। अपने कर्मचारियों को ज्यादा कंट्रीब्य़ूशन का विकल्प देना होगा। EPFO की गाईडलाइंस के बाद कई सारी बातें साफ होंगी।