डीमैट अकाउंट्स और म्यूचुअल फंड फोलियोज में नॉमिनेशन के नियम बदलने जा रहे हैं। सेबी ने इस बारे में एक प्रस्ताव 17 मार्च को पेश किया है। उसने इस पर लोगों की राय मांगी है। इस पर 7 अप्रैल तक राय दी जा सकती है। नॉमिनेशन के नए नियम पहले के नियम से आसान हैं। नॉमिनी की डिटेल्स देने के लिए सिर्फ दो फील्ड्स होंगे। इनवेस्टर को सिर्फ नॉमिनी का नाम और रिश्ता बताना होगा।
एड्रेस सहित कई जानकारियां वैकल्पिक हो जाएंगी
एड्रेस, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और हिस्सेदारी (फीसदी) की जानकारी वैकल्पिक हो जाएगी। सेबी के प्रस्ताव में सभी नए सिंगल होल्डर अकाउंट्स के लिए नॉमिनेशन को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाने की बात कही गई है। जो इनवेस्टर्स किसी व्यक्ति को नॉमिनी नहीं बनाना चाहते हैं उन्हें एक डिक्लेरेशन सब्मिट करना होगा। इसे ऑनलाइन भी सब्मिट किया जा सकता है।
इनवेस्टर के जीवित रहने पर नॉमिनी अकाउंट ऑपरेट नहीं करेगा
ज्वाइंट अकाउंट्स के लिए नॉमिनेशन ऑप्शनल होगा। रेगुलेटर ने नॉमिनेशन नहीं करने के वीडियो-आधारित विकल्प को हटा दिया है। इसकी जगह आसान डिजिटल डेक्लेरेशन का प्रस्ताव है। सेबी ने यह स्पष्ट किया है कि इनवेस्टर के जीवित रहने पर नॉमिनी को अकाउंट ऑपरेट करने की इजाजत नहीं होगी।
इनवेस्टर के अमर्थ होने पर नॉमिनी अकाउंट ऑपरेट नहीं करेगा
रेगुलेटर के प्रस्ताव में कहा गया है कि उस पुराने प्रावधान को हटा दिया जाएगा, जिसमें इनवेस्टर के असमर्थ होने पर नॉमिनी को अकाउंट ऑपरेट करने की इजाजत थी। सेबी ने कहा है कि इसकी जगह इस तरह की स्थितियों में इनवेस्टर को मौजूदा पावर ऑफ एटॉर्नी (PoA) के रास्ते का इस्तेमाल करना होगा।
नए नियम में मैक्सिम 4 तक नॉमिनी बनाने की इजाजत होगी
प्रस्तावित नियमों में यह भी कहा गया है कि इनवेस्टर के निधन के बाद ही नॉमिनी बतौर ट्रस्टी कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में काम करेगा। उसे ओनरशिप राइट्स नहीं मिलेंगे। पहले सेबी ने 10 तक नॉमिनी बनाने की इजाजत दी थी। नए नियम में मैक्सिमम 4 नॉमिनी बनाए जा सकते हैं। यह बदलाव बैंक के नियमों को ध्यान में रखकर किया गया है।
हिस्सा तय नहीं होने पर संपत्ति का होगा एक समान बंटवारा
नए प्रस्तावित नियम में यह कहा गया है कि अगर इनवेस्टर ने हर नॉमिनी की हिस्सेदारी तय नहीं की है तो एसेट्स का बंटवारा सभी नॉमिनी के बीच एक समान होगा। अनक्लेम्ड एसेट्स की समस्या के समाधान के लिए सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि नॉमिनी नहीं बनाए जाने की स्थिति में इंटरमीडियरीज को एसएमएस, ईमेल और प्लेटफॉर्म नोटिफिकेशंस के जरिए इनवेस्टर्स को समय-समय पर रिमाइंडर भेजना होगा।