Income Tax: कमाई 12 लाख से सिर्फ ₹1500 ज्यादा होने पर क्या लगेगा ₹60000 का टैक्स? जानिए क्या है नियम

Income Tax Rebate Calculation Rules: न्यू टैक्स रिजीम के तहत अगर आपकी सालाना टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख की सीमा से महज एक रुपया भी ऊपर चली गई, तो आप सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले पूरे टैक्स रिबेट को खो देंगे और आप पर एक भारी-भरकम टैक्स बिल आ गिरेगा। अगर आपके मन में भी यही डर है, तो आपके लिए राहत की खबर है

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 12:06 PM
नए टैक्स रिजीम के तहत, अगर आपकी कुल टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से अधिक नहीं है, तो आपको ₹60000 तक का पूरा टैक्स छूट मिलती है

New Tax Regime Marginal Relief: नए टैक्स रिजीम को पहली बार देखने पर ऐसा लग सकता है कि यह बेहद सख्त है। कई टैक्सपेयर्स को डर रहता है कि अगर उनकी सालाना टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख की सीमा से महज एक रुपया भी ऊपर चली गई, तो वे सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले पूरे टैक्स रिबेट को खो देंगे और उन पर एक भारी-भरकम टैक्स बिल आ गिरेगा।

अगर आपके मन में भी यही डर है, तो आपके लिए राहत की खबर है। इनकम टैक्स कानून में इस स्थिति से निपटने के लिए एक बेहतरीन 'सुरक्षा कवच' इन-बिल्ट है। यह राहत प्रावधान आपकी थोड़ी सी बढ़ी हुई कमाई पर असंगत रूप से बड़ा टैक्स का झटका लगने से रोकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि क्या ₹12 लाख से महज ₹1500 ज्यादा कमाने पर आपको पूरा टैक्स देना होगा या कोई और रास्ता भी है।

₹12 लाख से ₹1500 ज्यादा कमाने पर कितना लगेगा टैक्स?


मान लीजिए फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 में आपकी कुल टैक्सेबल इनकम ₹1201500 है। चूंकि आपकी आय धारा 87A के तहत रिबेट का दावा करने की ₹12 लाख की सीमा को पार कर गई है, तो क्या आपको ₹4 लाख की बेसिक छूट सीमा के बाद स्लैब रेट के हिसाब से पूरा ₹60225 का टैक्स देना होगा? आपको यह बेहद गलत लग सकता है कि सिर्फ ₹1500 एक्स्ट्रा कमाने की वजह से ₹60225 का इतना भारी टैक्स थोपा जा रहा है। क्या इससे बचने का कोई रास्ता है?'

क्या कहता है धारा 87A का नियम?

नए टैक्स रिजीम के तहत, अगर आपकी कुल टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से अधिक नहीं है, तो धारा 87A के तहत आपको ₹60000 तक का पूरा टैक्स छूट मिलती है। इसका मतलब है कि ₹12 लाख तक की आय पर आपका नेट टैक्स शून्य हो जाता है।

लेकिन नियम के मुताबिक, जैसे ही आपकी नॉर्मल इनकम ₹12 लाख की सीमा को पार करती है, आप तकनीकी रूप से धारा 87A के इस फ्लैट रिबेट के हकदार नहीं रह जाते। ऐसे में टैक्स की गणना सीधे ₹4 लाख की बेसिक छूट सीमा के ऊपर से की जाती है, जो कि आपके मामले में ₹60225 बैठती है।

'मार्जिनल रिलीफ' की इस ट्रिक से मिलेगी बड़ी राहत

टैक्सपेयर्स को इसी तगड़े झटके से बचाने के लिए कानून में 'मार्जिनल रिलीफ' का प्रावधान किया गया है। यह नियम विशेष रूप से केवल नए टैक्स रिजीम के तहत लागू होता है। मार्जिनल रिलीफ का फॉर्मूला बेहद सीधा है:

अगर आपकी नॉर्मल इनकम ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर जाती है, तो आपकी कुल टैक्स लायबिलिटी को केवल उसी रकम तक सीमित कर दिया जाएगा, जितनी रकम आपकी आय ₹12 लाख की सीमा से ऊपर गई है। आपके मामले में कुछ ऐसी होगी गणना:

आपकी आय ₹1201500 है, जो कि ₹12 लाख की सीमा से केवल ₹1500 ज्यादा है।मार्जिनल रिलीफ के कारण आपका कुल टैक्स ₹60225 नहीं, बल्कि सिर्फ ₹1500 ही बनेगा। यानी, आपको अपनी बढ़ी हुई मामूली आय से एक भी रुपया ज्यादा टैक्स के रूप में नहीं देना होगा। इनकम टैक्स विभाग आपको बाकी के ₹58725 की पूरी मार्जिनल रिलीफ दे देगा।

ओल्ड टैक्स रिजीम वालों को झटका, वहां नहीं मिलती यह राहत

यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान रखने वाली है कि यह मार्जिनल रिलीफ ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले करदाताओं को नहीं मिलती है। ओल्ड टैक्स रिजीम में जैसे ही आपकी कुल टैक्सेबल आय ₹5 लाख की थ्रेशोल्ड सीमा को पार करती है, आपको बिना किसी मार्जिनल रिलीफ के शुरुआती स्लैब रेट से पूरा टैक्स चुकाना पड़ता है। इसलिए मामूली रूप से सीमा पार करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए न्यू टैक्स रिजीम बेहद फायदेमंद साबित होता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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