क्या आप निवेश करने के लिए सही मौके की तलाश में हैं? फिर iThought के श्याम शेखर की सलाह आपके लिए बहुत मायने रखती है। उनका कहना है कि आपको निवेश के लिए मौके का इंतजार नहीं करना चाहिए। निवेश में इंतजार करना मौके गंवाने जैसा है। शेखर को शेयरों सहित दूसरे तरह के निवेश का व्यापक अनुभव है। मनीकंट्रोल ने निवेश से जुड़े कई मसलों पर उनसे व्यापक बातचीत की।
उन्होंने कहा कि निवेश के लिए इंतजार करने की जगह निवेश करने के बाद इंतजार करना सबसे अच्छी रणनीति है। आपको धीरे-धीरे निवेश करते रहना चाहिए। खासकर जब मार्केट में गिरावट हो तो निवेश करना फायदेमंद रहेगा। अगर आप 10 लाख रुपये इनवेस्ट करना चाहते हैं तो आपको 60 फीसदी पैसा शेयरों (shares) में लगाना चाहिए। बाकी पैसे आप गोल्ड (Gold) और शॉर्ट टर्म डेट फंड्स (Short term debt funds) में इनवेस्ट कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शेयरों में निवेश के लिए तय 60 फीसदी हिस्से में से 10 फीसदी का निवेश विदेशी कंपनियों के शेयरों में करना फायदेमंद रहेगा। विदेशी कंपनियों में अमेरिकी कंपनियां अच्छी रहेंगी। लेकिन, ज्यादा वैल्यूएशन की वजह से अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश करना आसान नहीं है।
शेखर ने कहा कि कई एक्सपर्ट्स म्यूचुअल फंड्स के जरिए स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में निवेश करने की सलाह देते हैं। इनके साथ एक समस्या यह है कि देखते-देखते अच्छे परफॉर्मेंस वाले फंड काफी बड़े हो जाते हैं, क्योंकि इनवेस्टर्स परफॉर्मेंस के पीछे भागते हैं। इससे स्मॉलकैप और मिडकैप फंड का आकार बड़ा हो जाता है। यही वजह है कि स्मॉलकैप फंड्स में इन दिनों ज्यादा निवेश दिख रहा है। इनवेस्टर्स यह मानते हैं कि लंबी अवधि में उन्हें लार्जकैप के मुकाबले स्मॉलकैप फंडों से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। लेकिन, ऐसा सोचना हमेशा सही साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं।
iThought के प्रमुख ने कहा कि इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में पांच या छह फंड होने चाहिए। एक बात जो परेशान करती है वह यह है कि बड़ी संख्या में लोग खुद ही इनवेस्टमेंट के फैसले ले रहे हैं। आपको म्यूचुअल फंड स्कीम या शेयरों में बहुत ज्यादा पॉजिशन बनाने की जरूरत नहीं है। पिछले साल कई इनवेस्टर्स ने अमेरिकी शेयरों में निवेश किया था। उन्होंने गलत समय पर यह निवेश किया था। निवेश का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपने पैसे को धीरे-धीरे निवेश करें।
उन्होंने कहा कि इंडिया में इनफ्लेशन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगा। लेकिन, इनफ्लेशन के नीचे आने में थोड़ा समय लगेगा। जहां तक घरेलू मार्केट की बात है तो मेरा मानना है कि विदेशी फंड की आवक और निकासी (Outflows) को लेकर रिस्क दिख रहा है। बहुत ज्यादा विदेश फंड के आने या जाने से समस्या खड़ी हो सकती है। दूसरा रिस्क एक्सचेंज रेट को लेकर है। इंडिया को अपने फॉरेक्स रिजर्व का सही इस्तेमाल करना होगा।