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दूसरी प्रॉपर्टी से किराये कमाई का सपना? यील्ड, खालीपन और टैक्स का कड़वा सच जान लीजिए

दूसरी प्रॉपर्टी खरीदकर नियमित किराया कमाने का आइडिया आकर्षक लगता है, लेकिन भारत में यह अक्सर महंगा साबित होता है। रेंटल यील्ड आमतौर पर 2-3% रहती है, जो खर्च और टैक्स काटने पर घटकर 1.5-2% हो जाती है। वैकेंसी, मेंटेनेंस और लोन EMI इसे और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 02, 2026 पर 11:12 PM
दूसरी प्रॉपर्टी से किराये कमाई का सपना? यील्ड, खालीपन और टैक्स का कड़वा सच जान लीजिए

भारत में रियल एस्टेट को अक्सर सुरक्षित निवेश माना जाता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि दूसरी प्रॉपर्टी खरीदकर उसे किराये पर देकर स्थायी आय बनाई जा सकती है। लेकिन हकीकत उतनी आसान नहीं है जितनी दिखती है। हाल ही में एक रिपोर्ट ने इस सवाल पर रोशनी डाली है कि क्या दूसरी प्रॉपर्टी से किराये की कमाई वास्तव में लाभकारी है या सिर्फ एक भ्रम।

किराये की आय बनाम निवेश लागत

भारत में रेंटल यील्ड यानी किराये से होने वाली वार्षिक आय, प्रॉपर्टी की कीमत के मुकाबले सिर्फ 2-3% के बीच रहती है। यानी अगर आपने 1 करोड़ की फ्लैट खरीदी है तो सालाना किराया मुश्किल से 2-3 लाख तक ही मिलेगा। वहीं, बैंक एफडी या म्यूचुअल फंड्स जैसे विकल्पों में इससे कहीं बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

खाली रहने का जोखिम

दूसरी बड़ी चुनौती है वैकेंसी रिस्क। कई बार प्रॉपर्टी महीनों तक खाली रहती है, जिससे न सिर्फ किराये की आय रुक जाती है बल्कि मेंटेनेंस चार्ज, सोसाइटी फीस और टैक्स का बोझ भी मालिक पर ही आता है। खासकर मेट्रो शहरों में जहां किरायेदार जल्दी-जल्दी बदलते हैं, यह समस्या और बढ़ जाती है।

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