पीएफ अकाउंट होल्डर्स की चांदी! ₹7 लाख का मुफ्त इंश्योरेंस तो मिलेगा ही, सरकार ने जोड़ा एक और बड़ा फायदा

EDLI Scheme 2026 New Rules: नए नियम के अनुसार, अब अगर किसी ईपीएफ मेंबर की असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को पीएफ खाते में जमा कुल फंड तो मिलेगा ही, साथ ही उसके औसत पीएफ बैलेंस के आधार पर अलग से एक अतिरिक्त एश्योरेंस राशि दी जाएगी। जानें नए नियमों से EPFO सदस्यों को क्या-क्या बड़े फायदे होने वाले हैं

अपडेटेड Jul 10, 2026 पर 1:44 PM
यह नई योजना 29 जून से पूरे देश में लागू हो चुकी है

EPFO EDLI Scheme 2026 New Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों सब्सक्राइबर्स और उनके परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद शानदार फैसला लिया है। सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत करीब पांच दशक पुरानी योजना को बदलते हुए 'कर्मचारी निक्षेप सहबद्ध बीमा योजना 2026' (EDLI Scheme 2026) को नोटिफाई कर दिया है। यह नई योजना 29 जून से पूरे देश में लागू हो चुकी है।

इस नए कानून में नौकरीपेशा कर्मचारियों के परिवारों को सुरक्षित करने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। जहां एक तरफ अधिकतम ₹7 लाख का फ्री इंश्योरेंस कवर जारी रखा गया है, वहीं पीएफ बैलेंस के आधार पर ₹1 लाख का अतिरिक्त एश्योरेंस बेनिफिट भी जोड़ दिया गया है। आइए जानते हैं कि नए नियमों से EPFO सदस्यों को क्या-क्या बड़े फायदे होने वाले हैं।

1. PF बैलेंस से जुड़ा नया फायदा


EDLI 2026 योजना में जो सबसे बड़ा और नया बदलाव किया गया है, वह है पीएफ बैलेंस से जुड़ा अतिरिक्त एश्योरेंस बेनिफिट।

क्या है नया नियम: अब अगर किसी ईपीएफ (EPF) मेंबर की असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार (नॉमिनी) को पीएफ खाते में जमा कुल फंड तो मिलेगा ही, साथ ही उसके औसत पीएफ बैलेंस के आधार पर अलग से एक अतिरिक्त एश्योरेंस राशि दी जाएगी।

कितना मिलेगा पैसा: अगर कर्मचारी का औसत पीएफ बैलेंस ₹50,000 से अधिक है, तो नॉमिनी को ₹50,000 की फिक्स्ड राशि मिलेगी और साथ ही ₹50,000 से ऊपर की रकम का 40% हिस्सा अतिरिक्त दिया जाएगा। इस नए नियम के तहत मिलने वाला यह एक्स्ट्रा फायदा अधिकतम ₹1 लाख तक सीमित किया गया है।

2. ₹7 लाख का इंश्योरेंस कवर रहेगा बरकरार

सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले पुराने लाइफ इंश्योरेंस के फायदे को भी नए नियमों में सुरक्षित रखा है। अगर किसी कर्मचारी ने मृत्यु से पहले लगातार 12 महीने तक नौकरी की है, तो उसके परिवार को मिलने वाले इंश्योरेंस की गणना पुराने फॉर्मूले (औसत मासिक वेतन का 35 गुना + औसत पीएफ बैलेंस का 50%) के आधार पर होगी।

इस नियम के तहत मिलने वाला न्यूनतम इंश्योरेंस क्लेम ₹2.5 लाख और अधिकतम क्लेम ₹7 लाख तय रहेगा। इसके अलावा, कुछ विशेष प्रावधानों के तहत मिलने वाले एश्योरेंस बेनिफिट में 20% की अतिरिक्त बढ़ोतरी का भी रास्ता साफ किया गया है।

3. नौकरी छूटने या पीएफ योगदान रुकने के बाद भी सुरक्षा

अक्सर देखा जाता था कि पीएफ योगदान रुकने के तुरंत बाद मौत होने पर परिवारों को क्लेम मिलने में दिक्कत आती थी। नए नियमों में सरकार ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। अगर किसी ईपीएफ मेंबर की मौत कंपनी के रोल पर रहते हुए आखिरी पीएफ कंट्रीब्यूशन के 6 महीने के भीतर हो जाती है, तो भी उसका परिवार इस ₹7 लाख के इंश्योरेंस क्लेम को पाने का पूरी तरह हकदार रहेगा।

4. 20 दिन में होगा क्लेम सेटलमेंट, देरी हुई तो अधिकारी की जेब से लगेगा जुर्माना

EPFO की सर्विस को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने दावों के निपटारे की समय-सीमा को बेहद कड़ा कर दिया है:

20 दिन की डेडलाइन: अब सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा किए गए इंश्योरेंस क्लेम को अधिकतम 20 दिनों के भीतर सेटल करना अनिवार्य होगा।

12% का जुर्माना: अगर कोई पीएफ अधिकारी बिना किसी ठोस वजह के इस तय समय-सीमा में क्लेम पास नहीं करता है, तो विभाग पीड़ित परिवार को 12% सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज देगा। सबसे खास बात यह है कि ब्याज की यह रकम देरी करने वाले संबंधित अधिकारी की जेब से वसूली जा सकती है।

5. पूरी तरह डिजिटल हुआ सिस्टम

नई नीति के तहत पूरे ईपीएफओ इकोसिस्टम को डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है। नियोक्ताओं के लिए अब हर महीने की समाप्ति के 15 दिनों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक मोड या डिजिटल पेमेंट के जरिए ही इंश्योरेंस फंड में योगदान और प्रशासनिक शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही, रिटर्न दाखिल करने और कर्मचारियों द्वारा इंश्योरेंस क्लेम सबमिट करने की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल कर दिया गया है।

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