प्राइवेट नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब छह महीने से कम जॉब करने पर भी ईपीएफ में जमा पूरा पैसा निकल जाएगा। इसके लिए एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) ने नियमों में बदलाव किया है। इसका फायदा प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों को मिलेगा। खासकर उन लोगों को मिलेगा, जो नौकरी बदलते रहते हैं। इसके लिए एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस), 1995 के नियम में सरकार ने बदलाव किया है। सरकार ने इस बदलाव के बारे में 26 जून को जानकारी दी है। यह बदलाव क्या है, इसका फायदा किस तरह मिलेगा, किन लोगों को इसका फायदा मिलेगा? आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
ऐसे समझें क्या है यह बदलाव
ईपीएफ (EPF) में एंप्लॉयी का हर महीने दो तरह से पैसा जाता है। उसकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) में जाता है। हर महीने एंप्लॉयर (कंपनी) भी उतना ही पैसा कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन, एंप्लॉयर के कुल कंट्रिब्यूशन का 8.33 फीसदी पैसा एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है और 3.67 फीसदी पीएफ में जाता है। अभी तक यह नियम था कि अगर कोई एंप्लॉयी किसी कंपनी में छह महीने से पहले नौकरी छोड़ देता है तो उसे एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPF) में जमा पैसा नहीं मिलेगा। नियम में बदलाव के बाद अगर एंप्लॉयी 6 महीने से पहले नौकरी छोड़ता है तो भी उसे ईपीएस में जमा पैसा मिलेगा।
पहले छह महीने से पहले नौकरी छोड़ने पर एंप्लॉयी को सिर्फ ईपीएफ में जमा पैसा मिलता था। उसे ईपीएस में जमा पैसा नहीं मिलता था। अब छह महीने से पहले नौकरी छोड़ने पर भी एंप्लॉयी को EPF और EPS में जमा पैसा मिल जाएगा। माना जा रहा है कि नियम में इस बदलाव का फायदा हर साल 7 लाख से ज्यादा एंप्लॉयीज को मिलेगा। लेबर मिनिस्ट्री की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह देखा गया है कि हर साल 7 लाख से ज्यादा एंप्लॉयीज 6 महीना पूरा होने से पहले ही नौकरी छोड़ देते हैं। अभी तक ईपीएस में जमा उनका पैसा डूब जाता था।
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जानिए टेबल डी में संशोधन का मतलब क्या है?
ईपीएफओ ने एक और बड़ा बदलाव किया है। उसने टेबल डी में संशोधन किया है। इससे ईपीएस मेंबर के विड्रॉल करने पर उसे नौकरी में पूरे होने वाले हर महीने का लाभ मिलेगा। सरकारी की तरफ से जारी रिलीज में कहा गया है कि अब विड्रॉल बेनेफिट का अमाउंट इस बात पर निर्भर करेगा कि एंप्लॉयीज ने कुल कितने महीने नौकरी की है। साथ ही किस वेज के आधार पर ईपीएस में उसका कंट्रिब्यूशन हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक, नियम में इस बदलाव का फायदा 23 लाख से ज्यादा एंप्लॉयीज को मिलेगा। ईपीएस के नियम के तहत पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी जरूरी है। अभी तक विड्रॉल अमाउंट का कैलकुलेशन नौकरी के पूरे किए गए साल के आधार पर होता था।