Emergency Fund या पर्सनल लोन, अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर किसका करें इस्तेमाल?

कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब हमें अचानक पैसे की जरूरत पड़ती है। कई लोग ऐसे में दोस्त-रिश्तेदार की मदद लेते हैं। कई लोग बैंक या एनबीएफसी से पर्सनल लोन लेना पसंद करते हैं। सवाल यह है कि अगर आपके पास इमर्जेंसी फंड है तो ऐसी स्थिति में आपको उसका इस्तेमाल करना चाहिए या पर्सनल लोन लेना चाहिए

अपडेटेड Dec 09, 2024 पर 10:05 AM
इमर्जेंसी फंड एक ऐसा फंड है, जिसे व्यक्ति उन स्थतियों को ध्यान में रख तैयार करता है, जब उसे अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाती है।

कई बार हमारे सामने ऐसी स्थिति आ जाती है जब हमें अपने इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल करना पड़ता है या पर्सनल लोन लेने को मजबूर होना पड़ता है। आम तौर पर परिवार में किसी सदस्य के बीमार पड़ने या अचानक नौकरी छूट जाने पर ऐसा होता है। अब सवाल है कि ऐसी स्थिति में हमें पर्सनल लोन लेना चाहिए या अपने इमर्जेंसी फंड का इस्तेमाल करना चाहिए? आइए इस सवाल का जवाब विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

क्या है इमर्जेंसी फंड?

इमर्जेंसी फंड (Emergency Fund) एक ऐसा फंड है, जिसे व्यक्ति उन स्थतियों को ध्यान में रख तैयार करता है, जब उसे अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाती है। आम तौर पर लोग इमर्जेंसी फंड के लिए बैंक सेविंग्स अकाउंट (Savings Fund) या लिक्विड फंड (Liquid Fund) का इस्तेमाल करते हैं। दोनों में इंटरेस्ट या रिटर्न काफी कम होता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा आपके हाथ में आ जाता है। इमर्जेंसी फंड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर हमें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है।


इमर्जेंसी फंड का क्या है फायदा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्जेंसी फंड से आप उतना ही पैसा निकालते हैं, जितने से आपका काम चल जाए। उदाहरण के लिए अचानक कार खराब हो जाने पर अगर रिपेयरिंग के लिए 35,000 रुपये की जररूत है तो आप उतना ही पैसा अपने इमर्जेंसी फंड से निकालते हैं। फिर, धीरे-धीरे कर आप अपने इमर्जेंसी फंड को बढ़ाकर पहले के लेवल पर कर देते हैं। इससे आपकी फाइनेंशियल सेहत पर किसी तरह का खराब असर नहीं पड़ता है। आपको किसी से उधार लेने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।

पर्सनल लोन का क्या है मतलब?

अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन दूसरा तरीका है। लेकिन, इसमें थोड़ा समय लगता है। पहले आपको लोन की रिक्वेस्ट डालनी पड़ती है। उसके एप्रूव होने के बाद बैंक या एनबीएफसी आपके सेविंग्स अकाउंट में पर्सनल लोन का पैसा ट्रांसफर कर देती है। पर्सनल लोन की सबसे बड़ी खराब यह है कि इसका इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है। कई बार बैंक या एनबीएफसी पर्सनल लोन पर प्रोसेसिंग फीस भी वसूलते हैं। इससे कुल लोन की कॉस्ट बढ़ जाती है। हालांकि, थोड़ा महंगा होने के बावजूद यह अचानक पैसे की जरूरत पूरी करने में मददगार है। दूसरा फायदा यह है कि आप अपनी क्षमता के हिसाब से EMI में इस लोन का रिपेमेंट कर सकते हैं।

इमर्जेंसी फंड या पर्सनल लोन?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपके पास इमर्जेंसी फंड है तो अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल करना ठीक रहेगा। इसमें पैसे के इस्तेमाल की कॉस्ट बहुत कम होती है। यही वजह है कि फाइनेंशियल एडवाइजर्स इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं। अगर आपके पास इमर्जेंसी फंड नहीं है तभी आपको पर्सनल लोन लेने के बारे में सोचना चाहिए।

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पर्सनल लोन में किन बातों का रखें ध्यान?

पर्सनल लोन लेने में भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पहला, इसका इंटरेस्ट रेट कम होना चाहिए। आप अपने क्रेडिट कार्ड पर भी पर्सनल लोन ले सकते हैं। अगर आपके पास एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड हैं तो आप उनके पर्सनल लोन के ऑफर की जांच कर सकते हैं। जिस कार्ड पर आपको कम इंटरेस्ट पर लोन मिल रहा है उसे आप ले सकते हैं।

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