EPF Partial Withdrawal New Rules 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए बड़ी खबर है। EPFO ने अपने सदस्यों के लिए पीएफ खाते से आंशिक निकासी के नियमों को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा अधिसूचित 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' के तहत इन नए नियमों को लागू कर दिया गया है।
पहले अलग-अलग वजहों के लिए ढेर सारे नियम और फॉर्म हुआ करते थे, लेकिन अब ईपीएफओ ने एडवांस क्लेम को केवल तीन मुख्य श्रेणियों में बांट दिया है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये 3 नई श्रेणियां कौन सी हैं, आप कितनी बार पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं और इसके लिए क्या-क्या शर्तें तय की गई हैं।
ईपीएफ एडवांस की 3 नई श्रेणियां
EPFO ने आंशिक पीएफ निकासी की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सभी प्रकार के एडवांस क्लेम्स को तीन प्रमुख श्रेणियों में पुनर्गठित किया है। श्रेणी-I (जरूरी आवश्यकताएं) के तहत सदस्य बीमारी (स्वयं एवं परिवार) के इलाज के लिए बिना किसी सीमा के जितनी बार चाहें उतनी बार एडवांस निकाल सकते हैं, जबकि शिक्षा के लिए पूरी ईपीएफ सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार और विवाह के लिए अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति दी गई है।
श्रेणी-II (आवास संबंधी आवश्यकताएं) में मकान, फ्लैट या प्लॉट की खरीद, नए मकान का निर्माण, होम लोन का पुनर्भुगतान और मकान का नवीनीकरण या सुधार शामिल हैं, जिनके लिए पूरी सदस्यता अवधि के दौरान कुल मिलाकर अधिकतम 5 बार ही एडवांस लिया जा सकता है। वहीं, बोर्ड द्वारा अधिसूचित श्रेणी-III (विशेष परिस्थितियां) के अंतर्गत सदस्य किसी भी एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 बार तक आंशिक निकासी कर सकते हैं।
निकासी के लिए जरूरी पात्रता और 75% का नया नियम
पीएफ खाते से एडवांस निकालने के लिए ईपीएफओ ने दो सबसे अहम नियम बनाए हैं:
12 महीने की न्यूनतम सदस्यता: किसी भी श्रेणी में आंशिक निकासी का लाभ उठाने के लिए सदस्य के पास कम से कम 12 महीने की ईपीएफ सदस्यता पूरी होनी अनिवार्य है।
75% एडवांस और 25% मिनिमम बैलेंस नियम: अब ईपीएफ सदस्य कर्मचारी व नियोक्ता के अंशदान और उस पर अर्जित कुल ब्याज का अधिकतम 75% तक ही एडवांस निकाल सकते हैं।
25% बैलेंस रहेगा सुरक्षित: खाताधारक को अपने कुल पीएफ बैलेंस का न्यूनतम 25% हिस्सा खाते में बनाए रखना अनिवार्य होगा, ताकि रिटायरमेंट के समय उनके पास सुरक्षित फंड बचा रहे।
कब से लागू हुए नियम और क्यों किया गया बदलाव?
अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने इस नए सरलीकृत ढांचे को मंजूरी दी थी। इसके बाद जुलाई 2026 से इसे वैधानिक रूप से पूरे देश में लागू कर दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, पुराने पेचीदा नियमों और दर्जनों शर्तों की जगह इस 3-कैटेगरी वाले सिस्टम से क्लेम रिजेक्शन के मामलों में भारी कमी आएगी और कर्मचारियों को इमरजेंसी के वक्त उनका पैसा तेजी से मिलेगा।