FD में ब्याज मंथली लें या मैच्योरिटी पर, किसमें ज्यादा फायदा है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

₹5 लाख की FD में हर महीने ब्याज लेना बेहतर है या मैच्योरिटी पर पूरा पैसा लेना? 7.1% ब्याज और 5 साल की अवधि के उदाहरण से समझिए दोनों विकल्पों में कितना अंतर आता है और कंपाउंडिंग से क्यूम्युलेटिव FD में कितना ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 6:17 AM
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अगर आपको हर महीने पैसे की जरूरत है तो मासिक ब्याज वाली FD ज्यादा काम की हो सकती है।

FD में पैसा लगाते समय सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। यह भी तय करना होता है कि ब्याज हर महीने चाहिए या मैच्योरिटी पर। दोनों विकल्पों में बड़ा फर्क है। हर महीने वाला विकल्प चुनने से नियमित कमाई मिलती है। वहीं, क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज जुड़ता रहता है। और उस पर भी ब्याज मिलता है। इसी वजह से लंबी अवधि में मैच्योरिटी वाला विकल्प ज्यादा रकम दे सकता है।

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD 7.1% सालाना ब्याज पर 5 साल के लिए कराई। अब देखते हैं कि दोनों विकल्पों में कितना पैसा बन सकता है।

हर महीने कितना ब्याज मिलेगा?


अगर आप मासिक ब्याज वाला विकल्प चुनते हैं तो करीब ₹2,958 हर महीने मिलेंगे। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹1.77 लाख होगा। आपका ₹5 लाख का मूलधन FD में बना रहेगा। मैच्योरिटी पर आपको यही ₹5 लाख वापस मिलेंगे।

यानी इस विकल्प में ब्याज आपको बीच-बीच में मिलता रहता है। इसलिए उस रकम पर FD के अंदर दोबारा ब्याज नहीं बनता।

मैच्योरिटी पर कितनी रकम मिलेगी?

अब यही ₹5 लाख क्यूम्युलेटिव FD में लगाते हैं। इसमें ब्याज हर महीने आपके खाते में नहीं आएगा। ब्याज FD में ही जुड़ता रहेगा। इस पर आगे ब्याज भी मिलेगा।

7.1% की दर और 5 साल की अवधि मानें तो रकम करीब ₹7.11 लाख हो सकती है। इसमें करीब ₹2.11 लाख ब्याज शामिल होगा।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क?

विकल्प निवेश कुल ब्याज
मैच्योरिटी पर रकम
मासिक ब्याज ₹5 लाख करीब ₹1.77 लाख ₹5 लाख
क्यूम्युलेटिव FD ₹5 लाख करीब ₹2.11 लाख करीब ₹7.11 लाख

इस हिसाब से क्यूम्युलेटिव FD में करीब ₹33,000 ज्यादा ब्याज बनता है। वजह साफ है। इसमें ब्याज FD में ही जुड़ता रहता है। उस पर भी ब्याज मिलता है। यही कंपाउंडिंग का फायदा है।

हर महीने इनकम चाहिए तो क्या करें?

अगर आपको हर महीने पैसे की जरूरत है तो मासिक ब्याज वाली FD ज्यादा काम की हो सकती है। इससे नियमित इनकम मिलती रहती है। रिटायरमेंट के बाद खर्च चलाने वाले लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

इसमें आपका मूलधन भी बना रहता है। बस ब्याज FD में वापस नहीं जुड़ता।

पैसा बढ़ाना है तो क्यूम्युलेटिव FD

अगर आपको FD से हर महीने इनकम नहीं चाहिए तो क्यूम्युलेटिव FD पर विचार किया जा सकता है। इसमें ब्याज को निकालने के बजाय FD में ही रहने दिया जाता है।

इससे ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। लंबी अवधि में यही कंपाउंडिंग आपकी कुल रकम को बढ़ाती है।

सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर फैसला न करें

FD का चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। हर महीने पैसे चाहिए तो मासिक ब्याज ठीक है। लंबे समय तक पैसा नहीं निकालना है तो क्यूम्युलेटिव FD ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

हालांकि, वास्तविक मैच्योरिटी रकम बैंक की ब्याज दर, कंपाउंडिंग के तरीके और FD की शर्तों पर निर्भर करेगी। FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में भी आता है। इसलिए निवेश से पहले टैक्स के बाद मिलने वाली रकम देखना ज्यादा सही रहेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

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