EPF Withdrawal: पीएफ निकालने पर कब नहीं देना पड़ता टैक्स? जानिए 5 साल वाला नियम और TDS का पूरा गणित

EPF Withdrawal Tax Rules: एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी ने 5 साल या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, तो आमतौर पर ईपीएफ निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगता है। ईपीएफ स्कीम 2026 का मुख्य जोर टैक्स नियमों में बदलाव के बजाय निकासी प्रक्रिया को आसान और क्लेम को जल्दी सेटल करने पर है

अपडेटेड Jul 27, 2026 पर 9:59 AM
कोई भी निकासी करने से पहले TDS और वास्तविक टैक्स देनदारी के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है

EPF Withdrawal Tax Rules Explained: नौकरीपेशा कर्मचारियों के बीच यह आम धारणा होती है कि अगर EPF निकासी के वक्त कोई टैक्स (TDS) नहीं कटा, तो वह रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री है। हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईपीएफ निकासी से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है।

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोई भी निकासी करने से पहले TDS और वास्तविक टैक्स देनदारी के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है। TDS केवल टैक्स वसूलने का एक जरिया है, जबकि आपकी वास्तविक और अंतिम टैक्स देनदारी तब तय होती है जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं।

ईपीएफ निकासी कब होती है पूरी तरह टैक्स-फ्री?


एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी ने 5 साल या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, तो आमतौर पर ईपीएफ निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगता है।

1- लगातार 5 साल की सेवा की शर्त: निरंतर सेवा का मतलब सिर्फ एक ही कंपनी में 5 साल काम करना नहीं है।

2- जॉब बदलने पर ऐसे मिलेगा फायदा: अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है और पुरानी कंपनी के ईपीएफ बैलेंस को निकालने के बजाय नई कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर देता है, तो उसकी पुरानी सेवा अवधि को भी नए कार्यकाल में जोड़ा जाता है।

3- टैक्स छूट की पात्रता: ऐसा करने से कर्मचारी कुल 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर लेता है और उसका ईपीएफ विड्रॉल टैक्स-फ्री हो जाता है।

कब ईपीएफ निकासी पर देना पड़ता है टैक्स?

  • 5 साल से कम की नौकरी होने पर निकासी आमतौर पर टैक्स योग्य हो जाती है जब तक कि कोई विशेष छूट लागू न हो।
  • अगर सेवा 5 साल से कम है, तो ₹50,000 की सीमा यह तय करती है कि TDS कटेगा या नहीं।
  • कुछ विशेष परिस्थितियों में 5 साल से कम की नौकरी के बावजूद टैक्स में राहत मिलती है।

टैक्स और TDS के नियम कैसे काम करते हैं?

5 साल की सेवा के बाद जमा हुई ईपीएफ राशि पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है और कोई TDS नहीं कटता। ऐसे ही 5 साल से कम की सेवा + ₹50,000 से कम निकासी पर कोई TDS नहीं कटता, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह पैसा अपने आप टैक्स-फ्री हो गया है। इसमें ITR फाइल करते समय अपनी कुल आय के अनुसार टैक्स देना हो सकता है।

वहीं 5 साल से कम की सेवा + ₹50,000 से अधिक निकासी पर अगर पैन अपडेट है, तो 10% की दर से TDS काटा जाता है। अगर पैन उपलब्ध नहीं है, तो उच्च दर से TDS कटेगा।

5 साल से पहले भी कब टैक्स-फ्री रहती है निकासी?

हर समय 5 साल से पहले निकाला गया पैसा टैक्स योग्य नहीं होता। कानून कर्मचारियों को उन परिस्थितियों में राहत देता है जहां नौकरी उनकी इच्छा या नियंत्रण के बाहर के कारणों से खत्म होती है:

  1. खराब स्वास्थ्य के कारण नौकरी छोड़ना या सेवा समाप्त होना।
  2. नियोक्ता का बिजनेस या कारोबार बंद होना।
  3. कोई भी अन्य गंभीर परिस्थिति जो कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर हो और नौकरी जाने का कारण बने।

ईपीएफ के अलग-अलग हिस्सों पर कैसे लगता है टैक्स?

जब 5 साल से पहले की ईपीएफ निकासी टैक्स योग्य होती है, तो उसके अलग-अलग घटकों पर अलग-अलग हेड के तहत टैक्स लगता है।

नियोक्ता का योगदान और उस पर मिला ब्याज: इसे 'वेतन से आय' के तहत टैक्स योग्य माना जाता है।

कर्मचारी का अपना योगदान पर मिला ब्याज: इसे 'अन्य स्रोतों से आय' के अंतर्गत गिना जाता है।

सेक्शन 80C का असर: कर्मचारी के अपने योगदान पर पूर्व में दावा की गई टैक्स छूट अगर ली गई हो उसका भी पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

₹2.5 लाख से अधिक योगदान पर ब्याज: एक साल में कर्मचारी द्वारा दिए गए ₹2.5 लाख से अधिक के योगदान पर मिला ब्याज भी टैक्स के दायरे में आता है।

अगर ज्यादा TDS कट गया तो रिफंड कैसे क्लेम करें?

अगर ईपीएफ निकालते वक्त आपका TDS कट गया है, लेकिन साल भर में आपकी कुल आय पर टैक्स देनदारी उससे कम बनती है, तो आप ITR के जरिए इसका रिफंड ले सकते हैं। इस मामले में एक्सपर्ट्स ये सलाह देते है कि, कर्मचारी पहले फॉर्म 26AS और एआईएस (AIS) में कटे हुए TDS की पुष्टि करें। इसके बाद ITR फाइल करते समय बचा हुआ टैक्स रिफंड के रूप में क्लेम करें।

EPF स्कीम 2026 और फॉर्म 121 का नया नियम

ईपीएफ स्कीम 2026 का मुख्य जोर टैक्स नियमों में बदलाव के बजाय निकासी प्रक्रिया को आसान और क्लेम को जल्दी सेटल करने पर है। इनकम टैक्स एक्ट के तहत 5 साल से पहले ₹50,000 से अधिक की निकासी करने पर शून्य TDS का लाभ लेने के लिए अब पुराने फॉर्म 15G/15H की जगह नया फॉर्म 121 लागू कर दिया गया है। भले ही फॉर्म जमा करना आसान हो गया हो, लेकिन निकासी टैक्स-फ्री होगी या नहीं, इसका सबसे बड़ा आधार '5 साल की निरंतर सेवा' ही बनी रहेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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