कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक जरूरी अपडेट है। ईपीएफओ ने अपने तय सिस्टम माइग्रेशन और डेटाबेस इंटीग्रेशन के काम को पूरा करने के बाद अपनी अधिकांश ऑनलाइन सदस्य सेवाओं को रीस्टोर कर दिया है। अब पीएफ खाताधारक UAN से जुड़े काम, प्रोफाइल मैनेजमेंट और दूसरी सदस्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए ईपीएफओ मेंबर पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। मेंबर पोर्टल पर पासबुक लाइट की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है लेकिन ईपीएफ पासबुक पोर्टल पर शुक्रवार (3 जुलाई) को सुबह 11:30 बजे तक पासबुक सेवा अनुपलब्ध स्टेटस दिखा रही है। पासबुक वेबसाइट पर दिख रही एक नोटिस के मुताबिक सिस्टम अपग्रेड का काम अभी भी चल रहा है। इसकी वजह से अन्य सदस्य और इंप्लॉयर सेवाओं की बहाली के बावजूद पासबुक सेवा अस्थायी रूप से बंद है।
टेक्नोलॉजी अपग्रेड के लिए 5 दिन बढ़ी थी डेडलाइन
ईपीएफओ ने अपने क्लेम-प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा टेक्नोलॉजी अपग्रेड शुरू किया था। इसके चलते ऑनलाइन सेवाओं को बंद रखने की अवधि को करीब 5 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया था। शुरुआत में ईपीएफओ ने बताया था कि मेंटेनेंस का ये काम 28 जून को पूरा हो जाएगा और 29 जून से सर्विस फिर से शुरू हो जाएंगी। इसके बाद इस समयसीमा में बदलाव करते हुए आउटेज को बढ़ा दिया गया था। आखिरकार अब जाकर 3 जुलाई से इन सेवाओं को बहाल करने की घोषणा की गई।
क्यों किया गया यह सिस्टम माइग्रेशन?
इस माइग्रेशन और डेटाबेस इंटीग्रेशन अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ईपीएफ सदस्यों और नियोक्ताओं के लिए क्लेम की प्रोसेसिंग को तेज बनाना, सिस्टम की विश्वसनीयता में सुधार करना और अधिक सुरक्षित डिजिटल सेवाएं प्रदान करना है। वैसे तो मेन ऑनलाइन सेवाएं अब चालू हो गई हैं लेकिन जो सदस्य अपनी ईपीएफ पासबुक देखने या डाउनलोड करने का इंतजार कर रहे हैं उन्हें पासबुक पोर्टल के पूरी तरह से बहाल होने तक अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
देश में लागू हुई नई ईपीएफ योजना 2026
ईपीएफओ की ऑनलाइन सेवाओं की यह बहाली ऐसे समय में हुई है जब बीते दिनों श्रम और रोजगार मंत्रालय ने छह दशक पुरानी ईपीएफ योजना 1952 की जगह पर नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 को नोटिफाई किया है। यह बदलाव सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 एग्जिक्यूट करने के सिलसिले में किया गया है। 29 जून से प्रभावी हुई यह नई योजना मुख्य रूप से कई बदलाव किए गए हैं। इसमें पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन रेट और मेंबरशिप से जुड़े बदलाव भी शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें डिजिटल कॉन्प्लायंस को को बढ़ावा देने, गवर्नेंस में सुधार करने और एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए अपडेटेड नियम पेश किए गए हैं।