FD Calculator: इंडियन बैंक ने एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। नया रेट 23 अक्तूबर से लागू हो गया है। यह बैंक में एफडी करने का प्लान बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। इंटरेस्ट बढ़ने से उन्हें अपने एफडी पर ज्यादा कमाई होगी। इंडियन बैंक एक सरकारी बैंक है।
स्कीम का इंटरेस्ट रेट 6.80 फीसदी पहुंचा
Indian Bank ने अपनी एफडी स्कीम Ind Grow का इंटरेस्ट रेट 15 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाया है। यह स्कीम 555 दिन की है। स्कीम का इंटरेस्ट रेट अब 6.65 फीसदी से बढ़कर सालाना 6.80 फीसदी हो गया है। आरबीआई के इस महीने की शुरुआत में रेपो रेट बढ़ाने के बाद इंडियन बैंक ने अपनी एफडी स्कीम का इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है।
RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद बैंक का फैसला
आरबीआई ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया था। आम तौर पर केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट बढ़ाने के बाद बैंक डिपॉजिट और लोन दोनों के इंटरेस्ट रेट में इजाफा करते हैं। आरबीआई के रेपो रेट में कमी करने के बाद बैंक अपने डिपॉजिट और लोन के इंटरेस्ट रेट में कमी करते है।
10 लाख पर इंटरेस्ट से होगी करीब 1,03,397 रुपये की कमाई
अगर आप इंडियन बैंक की 555 दिन वाली एफडी स्कीम में 10 लाख रुपये लगाते हैं तो 6.8 फीसदी इंटरेस्ट रेट पर आपको ब्याज के रूप में करीब 1,03,397 रुपये की कमाई होगी। इसका मतलब है कि आपको मैच्योरिटी पर कुल 11,03,397 रुपये मिलेंगे। यह कैलकुलेशन साधारण ब्याज के आधार पर है। अगर 6.8 फीसदी का ब्याज हर तिमाही मिलता है तो मैच्योरिटी अमाउंट करीब 11.10 लाख रुपये होगा।
सीनियर सिटीजंस को 0.50 फीसदी ज्यादा इंटरेस्ट रेट
इस स्कीम में सीनियर सिटीजंस को 0.5 फीसदी का अतिरिक्त ब्याज मिलता है। इसका मतलब है कि अगर कोई सीनियर सिटीजंस इस स्कीम में पैसा डिपॉजिट करता है तो बैंक उसे 7.3 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर करेगा। इससे इंटरेस्ट रेट के रूप में उसे ज्यादा कमाई होगी। उसे 10,000 लाख रुपये इस स्कीम में डिपॉजिट करने पर 7.3 इंटरेस्ट रेट के हिसाब से 555 दिन बाद कुल 11,11,000 रुपये मिलेंगे। इसमें इंटरेस्ट का 1,11,000 रुपये शामिल हैं। अगर इंटरेस्ट का पेमेंट हर तिमाही होता है तो मैच्योरिटी अमाउंट 11.17 लाख रुपये होगा।
इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स चुकाना होगा
FD Interest पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। दरअसल, इंटरेस्ट से हुई इनकम को दूसरे स्रोत से हुई इनकम माना जाता है। इसे इनवेस्टर की इनकम में जोड़ दिया जाता है। फिर, वह जिस टैक्स स्लैब में आता है, उसके हिसाब से इस पर टैक्स लगता है। ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों को इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। कम टैक्स स्लैब में आने वाले इनवेस्टर्स को कम टैक्स चुकाना पड़ता है।