आज के समय में निवेश के विकल्पों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प हैं। दोनों ही योजनाएं बैंक और पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित तरीके से गारंटी युक्त रिटर्न प्रदान करती हैं। लेकिन जब बात आती है लंबी अवधि में अधिक लाभ कमाने की, तो इन दोनों विकल्पों के बीचखेल होता है। तो आखिर किस योजना में निवेश करना आपके फायदे का सौदा होगा?
एफडी और आरडी का मुख्य अंतर क्या है?
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेशक एक बार में ही पूरे पैसे जमा करते हैं। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिनके पास एकमुश्त रकम होती है। बैंक से मिलने वाली ब्याज दरें भी समय और बैंक के अनुसार अलग-अलग होती हैं। जैसे कि SBI की FD पर ब्याज दर 3.05% से लेकर 6.60% तक है। इस योजना में निवेशक को हर वर्ष तय ब्याज मिलती है, जिसे वह अपनी जरूरतों के अनुसार निकाल सकता है।
वहीं, रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में आप हर माह तय रकम जमा करते हैं। यदि आप हर महीने 2000 रुपये RD में जमा करते हैं, तो 5 साल में कुल 1.20 लाख रुपये जमा होंगे, और स्कीम मैच्योरिटी पर आपको कुल 1.42 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें ब्याज भी सामान्य FD से ज्यादा होता है। यह योजना उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो छोटे-छोटे निवेश कर लंबी अवधि में पैसा बढ़ाना चाहते हैं।
अगर आप एकमुश्त पैसा निवेश कर सकते हैं और अधिक रिटर्न चाहते हैं, तो FD आपके लिए बेहतर है। सरकारी और प्राइवेट बैंक में एफडी की ब्याज दरें अलग-अलग हैं, लेकिन सामान्यतः RD से ज्यादा ब्याज मिलती है।
वहीं, यदि आप नियमित छोटी-छोटी बचत करना चाहते हैं और समय के साथ पैसा बढ़ाना चाहते हैं, तो RD उपयुक्त है। यह छोटी-छोटी बचत से लंबी अवधि में अच्छा लाभ दिला सकती है।
टैक्स के नियम और योजना का चुनाव
दोनों योजनाओं पर टैक्स नियम लागू होते हैं। यदि आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो प्राथमिकता आपकी टैक्स श्रेणी और आय पर निर्भर करेगी। दोनों ही योजनाओं में निवेश का अपनी जरूरत और जोखिम इच्छा के अनुसार चुनाव करना चाहिए।
यदि आप एकमुश्त निवेश कर सकते हैं, तो एफडी बेहतर विकल्प है। लेकिन अगर आप हर महीने छोटे-छोटे राशि जमा कर लंबी अवधि में अपना पैसा दोगुना या तिगुना करना चाहते हैं, तो RD आपके लिए ज्यादा फायदे की हो सकती है। दोनों ही विकल्प सुरक्षित हैं, इसलिए अपने वित्तीय लक्ष्य और जरूरत के अनुसार सही योजना चुनना जरूरी है।