FD Break Rules: इमरजेंसी में FD तोड़ने की सोच रहे हैं? जानें बैंक कितना काटते हैं पेनल्टी और क्या है सही तरीका
FD Premature Withdrawal Rules: इमरजेंसी में FD तोड़ने का मन बना रहे हैं? जरा ठहरिए! समय से पहले एफडी बंद करने पर बैंक न केवल आपकी तय ब्याज दर घटा देते हैं, बल्कि उल्टा पेनल्टी भी वसूलते हैं। इससे आपका रिटर्न उम्मीद से बहुत कम हो सकता है। जानिए क्या है इसका बेस्ट ऑप्शन
मैच्योरिटी से पहले FD से पैसा निकालने पर आपको भारी नुकसान हो सकता है
Premature FD Withdrawal: फिक्स्ड डिपॉजिट को हमेशा से एक सुरक्षित और फिक्स रिटर्न देने वाला निवेश माना जाता है। बुजुर्गों के साथ एक खास वर्ग बिना किसी टेंशन से इसमें पैसे लगाकर बैंक से एकमुश्त ब्याज लेता है। लेकिन जिंदगी में जब इमरजेंसी आती है, तो पैसे की जरूरत के समय लोग सबसे पहले अपनी एफडी ही तोड़ते हैं। हालांकि, मैच्योरिटी से पहले FD से पैसा निकालने पर आपको भारी नुकसान हो सकता है।
अगर आप भी अपनी एफडी समय से पहले बंद करने की सोच रहे हैं, तो जानिए कि बैंक इस पर कैसे ब्याज काटते हैं, पेनल्टी कैसे तय होती है और नुकसान से बचने के दूसरे विकल्प क्या हैं।
क्यों घट जाता है ओरिजिनल इंटरेस्ट रेट?
जब आप एफडी तुड़वाते हैं, तो बैंक आपको वह ब्याज दर नहीं देता जो खाता खोलते समय तय हुई थी। नियम के मुताबिक, एफडी जिस अवधि तक बैंक में रही है, बैंक उसी अवधि के लिए लागू ब्याज दर के आधार पर रिटर्न का हिसाब लगाता है।
एक उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपने 3 साल के लिए 7% की दर से एफडी कराई, लेकिन आपको 1 साल बाद ही पैसे की जरूरत पड़ गई। ऐसे में बैंक 3 साल का 7% ब्याज नहीं देगा, बल्कि यह देखेगा कि 1 साल की एफडी पर बैंक की क्या दर थी। अब आपका रिटर्न 7% की जगह 6% के हिसाब से तय होगा।
प्री-मैच्योर विड्रॉल पेनल्टी का दोहरा झटका
कम ब्याज दर तय करने के अलावा, बैंक एफडी को समय से पहले बंद करने पर पेनल्टी भी लगाते हैं। आमतौर पर बैंक संशोधित ब्याज दर पर 0.5% से 1% तक का जुर्माना लगाते हैं।
मान लीजिए 1 साल की एफडी का दर 6% था और बैंक की पेनल्टी 1% है, तो आपको केवल 5% ही ब्याज मिलेगा। इससे आपकी कुल कमाई उम्मीद से बहुत कम हो जाती है।
हर बैंक और एफडी के प्रकार (जैसे- टैक्स सेविंग एफडी) के नियम अलग होते हैं। इसलिए एफडी तोड़ने से पहले बैंक के पेनल्टी क्लॉज को जरूर चेक करें।
पूरे पैसे की जरूरत न हो तो क्या करें?
अगर आपको एफडी की पूरी रकम की जरूरत नहीं है, तो पूरी एफडी तोड़ना समझदारी नहीं है। आप इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:
FD पर लोन या ओवरड्राफ्ट: बैंक आपको आपकी एफडी की कुल रकम के 90% तक का लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा देते हैं।
फायदा क्या है: इससे आपकी एफडी चालू रहती है और उस पर ब्याज मिलता रहता है। आपको केवल उतने ही पैसों पर ब्याज देना होता है जितने की आपने क्रेडिट ली है। लोन के ब्याज और एफडी तोड़ने पर होने वाले नुकसान की तुलना करके ही फैसला लें।
एफडी तोड़ने से पहले ध्यान रखें ये 3 बातें
अगर आप इमरजेंसी में एफडी बंद करने ही वाले हैं, तो इन तीन चीजों की जांच तुरंत कर लें:
संशोधित ब्याज दर: जितने समय एफडी रही, उस अवधि का वर्तमान ब्याज दर क्या है?
पेनल्टी चार्ज: बैंक कितना प्रतिशत पेनल्टी काट रहा है?
लोन का विकल्प: क्या लोन या ओवरड्राफ्ट लेने पर नुकसान एफडी तोड़ने से कम होगा?
कुल मिलाकर एफडी इमरजेंसी के समय पैसों का एक अच्छा जरिया तो है, लेकिन समय से पहले पैसा निकालने पर रिटर्न कम हो जाता है। नुकसान से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि अपने कुल निवेश का कुछ हिस्सा हमेशा सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड फंड्स में रखें, ताकि एफडी को बिना वजह तोड़ने की नौबत न आए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।