इंडिया पर नहीं पड़ेगा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर: Sonal Desai of Franklin Templeton

देसाई ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को और 125-150 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ाएगा। इससे यह बढ़कर 5-5.50 फीसदी तक पहुंच जाएगा

अपडेटेड Nov 21, 2022 पर 4:01 PM
देसाई ने कहा कि इंडिया अमेरिकी मार्केट्स से अपेक्षाकृत कम कनेक्टेड है। इसके मुकाबले इंडिया पर ज्यादा असर ऑयल की कीमतों पर पड़ता है।

इंडिया में इनवेस्टर्स डेट (जैसे बॉन्ड्स) और फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज (Fixed Income Securities) के मुकाबले शेयरों (Equity) में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं। अमेरिका जैसे विकसित देशों में फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में ज्यादातर इनवेस्टर्स निवेश करते हैं। फ्रैंकलिन टेंपलटन (Franklin Templeton) के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट में फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी है। 32-33 फीसदी इक्विटी में है और करीब 18 फीसदी अल्टरनेटिव एसेट्स में है। फैंकलिन टेंपलटन फिक्स्ड इनकम की चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर सोनल देसाई (Sonal Desai) ने मनीकंट्रोल से निवेश, इनफ्लेशन, इंटरेस्ट रेट सहित कई मसलों पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि अमेरिका में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का असर इंडिया पर नहीं पड़ेगा। फेडरल रिजर्व अगले महीने की शुरुआत में इंटरेस्ट रेट के बारे में फैसला लेगा।

अमेरिका में और बढ़ेगा इंटरेस्ट रेट

देसाई ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को और 125-150 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ाएगा। इससे यह बढ़कर 5-5.50 फीसदी तक पहुंच जाएगा। मेरा अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अगले साल इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाएगा। वह 2024 में इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा। हालांकि, फेड के रेट बढ़ाने का असर इंडिया पर ज्यादा नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इंटरनेशनल कैपिटल फ्लो का खास असर इंडिया पर नहीं है। इंडिया अमेरिकी मार्केट्स से अपेक्षाकृत कम कनेक्टेड है। इसके मुकाबले इंडिया पर ज्यादा असर ऑयल की कीमतों पर पड़ता है।


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तुर्की में इनफ्लेशन 80 फीसदी से ज्यादा

उन्होंने कहा कि दुनिया में कई ऐसे उभरते देश हैं, जो कैपिटल फ्लो पर काफी ज्यादा निर्भर हैं। उनमें इनफ्लेशन का स्तर ज्यादा है। इन देशों में मॉनेटरी पॉलिसी के जरिए अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने की कोशिश हो रही है। आप तुर्की का उदाहरण ले सकते हैं। वहां इनफ्लेशन रेट 80 फीसदी से ऊपर पहुंच गया है। उसे जल्द आर्थिक मदद की जरूरत है।

इंडिया में निवेशकों की पसंद अमेरिका से अलग

फिक्स्ड म्यूचुअल फंड में निवेश इनवेस्टर के लिए कितना जरूरी है, यह पूछने पर देसाई ने कहा कि इंडिया में मामला थोड़ा अलग है। दुनियाभर में फिक्स्ड इनकम सबसे बड़ा एसेट क्लास है। यह बहुत बड़ा है। इंडिया का मामला विशेष है, क्योंकि यहां ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जिनके रिटर्न एडमिनिस्टर्ड होते हैं। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट इसका एक उदाहरण है। अमेरिका में फिक्स्ड इनकम फंड्स इनवेस्टर्स की पहली पसंद रहे हैं। अमेरिका में भी इनवेस्टर्स ने फिक्स्ड इनकम एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में निवेश करना शुरू कर दिया है। ईटीएफ सस्ते भी हैं।

मुश्किल हालात में आपका रोल मॉडल कौन होता है? इसके जवाब में देसाई ने रे डेलियो (Ray Dalio) का नाम लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक डेलियो ने कुछ सिद्धांत बनाए हैं। ये खुले विचार, मेरिटोक्रेसी, जिम्मेदारी और अलग तरह से सोचने के आर्ट पर आधारित हैं। इनमें ऑथेंटिसिटी, कल्चर, लोगों और सतत निवेश का ध्यान रखा गया है। मैं भी पर्सनल और वर्क लाइफ में इसी तरह से काम करना चाहती हूं। सर जॉन टेंपलटन भी रोल मॉडल हैं। उन्हें न सिर्फ इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट की शुरुआत का श्रेय जाता है बल्कि परोपकार में भी उनकी दिलचस्पी है।

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