एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख का कहना है कि भारत दुनिया भर में घट रही घटनाओं से अछूता नहीं रह सकता। अगर दूनिया के दूसरे देशों में मंदी आती है तो भारत को भी कुछ मंदी का सामना करना पड़ेगा। फिर भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती विश्व अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। दीपक पारेख ने 21 नवंबर को द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया में हो रहे 21वें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ एकाउंटेंट्स में बोलते हुए कहा, "भारत दुनिया से अलग-थलग नहीं रह सकता। अगर दूसरे देशों में मंदी आती है तो भारत को भी कुछ मंदी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन इस बात पर आम सहमति है कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।"
भारत अगले 5 सालों के भीतर बनेगा 7.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था
पारेख के मुताबिक, 2022 में देश की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (GDP growth) 7 फीसदी से थोड़ी कम रह सकती है, लेकिन इससे निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित लचीलापन इसको खास बनाता है। मुझे विश्वास है कि भारत अगले 5 सालों के भीतर 3.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 7.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।"
50 वर्षों में मैं भारत के बारे में इतना आशावादी कभी नहीं रहा, जितना आज हूं-दीपक पारेख
हाल ही में आई एक रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए दीपक पारेख ने कहा कि भारत का तेजी से विकास करता मिडिल क्लास, प्रति व्यक्ति आय में ग्रोथ की संभावना, देश की जीडीपी में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी में बढ़त की संभावना और स्टॉक मार्केट की जारी तेजी इस देश के लिए बड़े सकारत्मक संकेत हैं। अपने तीन दशकों के कार्यकाल में HDFC को देश की सबसे बड़ी मार्गेज लेंडिंग फर्म बनाने वाले दीपक पारेख ने कहा "मैं लोगों को यह बताते हुए कभी नहीं थकता कि मेरे कामकाजी जीवन के लगभग 50 वर्षों में मैं भारत के बारे में इतना आशावादी कभी नहीं रहा, जितना आज हूं।"
पारेख ने कहा कि भारत में काफी अच्छे काम हो रहे हैं। देश में इकोनॉमिक रिफार्म जारी है, रोजगार सृजन की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। फाइनेंशियल इन्क्लूजन और डिजिटलीकरण पर काफी काम किया गया है। इस सब कोशिशों को और आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, "आज, भारत में राजनीतिक स्थिरता है, वैक्सीन की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा है। भारत ने दुनिया के अधिकांश देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे हैं और अंतरराष्ट्रीय जगत में तेजी से अपनी मजबूत देश की पहचान बना रहा है।"
पारेख की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है और हाल के महीनों में अपनी ब्याज दर में लगभग 2 फीसदी की बढ़ोतरी की है। हालांकि कोविड-19 महामारी के बाद देश की इकोनॉमी में रिकवरी आई है लेकिन आरबीआई के लिए महंगाई एक बड़ी चुनौती बन के उभरी है।