नवरात्रि में खरीद रहे हैं सोना, तो रखें इन बातों का ध्यान, कभी नहीं होगा धोखा

गुड़ी पड़वा, उगादी, चैती चांद जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इसे नई शुरुआत और समृद्धि से जोड़ा जाता है। हालांकि इस साल सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 5:27 PM
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गुड़ी पड़वा, उगादी, चैती चांद जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है।

गुड़ी पड़वा, उगादी, चैती चांद जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इसे नई शुरुआत और समृद्धि से जोड़ा जाता है। हालांकि इस साल सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। एक साल पहले जहां 10 ग्राम सोना करीब 89,000 रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1.55 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसके बावजूद सोना आज भी लोगों के लिए भावनात्मक और निवेश दोनों नजरिए से खास बना हुआ है। आप भी सोना खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें।

हॉलमार्क जरूर चेक करें

सोना खरीदते समय सबसे जरूरी है उसकी शुद्धता की जांच। अब सरकार ने 380 जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है। ज्वैलरी पर BIS का निशान और 6 अंकों का HUID नंबर होना जरूरी है। इससे आपको असली और शुद्ध सोना मिलने की गारंटी मिलती है। लेकिन हाल ही में नकली हॉलमार्क के मामले भी सामने आए हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है।


खरीदने से पहले ऐसे करें जांच

आप BIS Care App के जरिए HUID नंबर डालकर ज्वैलरी की असली जानकारी तुरंत चेक कर सकते हैं। सोने की शुद्धता 916 (22 कैरेट) और 750 (18 कैरेट) जैसे नंबर से बताई जाती है। अगर शक हो तो आप BIS लैब में लगभग 200 रुपये में ज्वैलरी की जांच भी करवा सकते हैं।

बिल लेना न भूलें

सोना खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें। इसमें वजन, कीमत, मेकिंग चार्ज और HUID नंबर की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इससे बाद में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकता है।

मेकिंग चार्ज पर रखें नजर

आजकल ज्वैलर्स मेकिंग चार्ज पर ऑफर देते हैं, लेकिन कई बार इसमें छुपे हुए खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए पूरी कीमत समझकर ही खरीदारी करें। सोने पर 3% GST और मेकिंग चार्ज पर 5% GST लगता है।

कम बजट में ऐसे खरीदें सोना

अगर सोना महंगा लग रहा है तो हल्के डिजाइन या कम कैरेट की ज्वैलरी खरीद सकते हैं। पुराने गहनों को एक्सचेंज करके भी नई ज्वैलरी लेना एक अच्छा विकल्प है। इससे आपको कम खर्च में नया डिजाइन मिल जाता है।

पेपर गोल्ड भी है विकल्प

अगर आप ज्वैलरी नहीं लेना चाहते, तो गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसमें सोना स्टोर करने की चिंता नहीं होती और यह बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाव में मदद करता है।

टैक्स नियम समझें

फिजिकल गोल्ड को 2 साल बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म टैक्स लगता है, जबकि गोल्ड ETF पर यह अवधि 1 साल होती है। लॉन्ग टर्म गेन पर 12.5% टैक्स लगता है।

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