Budget 2024: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस साल में दूसरी बार पेश करेंगी बजट, जानिए कारण

Budget 2024: निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री का पदभार संभाला और जुलाई 2024 में पूर्ण केंद्रीय बजट पेश करने के लिए तैयार हैं। सभी की निगाहें अब पूर्ण बजट पर हैं

अपडेटेड Jun 12, 2024 पर 4:44 PM
Budget 2024: निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री का पदभार संभाला और जुलाई 2024 में पूर्ण केंद्रीय बजट पेश करने के लिए तैयार हैं।

Budget 2024: निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री का पदभार संभाला और जुलाई 2024 में पूर्ण केंद्रीय बजट पेश करने के लिए तैयार हैं। सभी की निगाहें अब पूर्ण बजट पर हैं, जहां उनसे प्रमुख नीतिगत घोषणाओं के साथ अगले पांच सालों के लिए दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उपायों को लागू करके बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर अपना ध्यान फोकस करेंगी।

भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री सीतारमण ने एक अंतरिम बजट सहित छह बजट पेश किए हैं। वित्त वर्ष 2015 के अंतरिम बजट में उन्होंने केवल लेखानुदान उपायों पर कायम रहकर परंपरा का पालन किया।

1 फरवरी 2024 को पेश किया गया अंतरिम बजट


अंतरिम बजट: साल की शुरुआत में वित्त मंत्री ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया। यह अंतरिम बजट एक अस्थायी वित्तीय जानकारी होती है जिसका उद्देश्य नई सरकार के कार्यभार संभालने तक सरकार को चालू रखना है।

अंतरिम बजट में खर्च और आवश्यक आवंटन शामिल होते हैं लेकिन आमतौर पर प्रमुख नीतिगत घोषणाओं या बदलावों से बचा जाता है। यह प्रथा चुनाव के बाद नई सरकार बनने तक सरकारी कामों और फंडिंग की निरंतरता को तय करता है।

पूर्ण बजट: आम चुनाव के बाद नवनिर्वाचित सरकार वित्तीय वर्ष के लिए पूर्ण बजट पेश करती है। इस साल उम्मीद है कि सरकार जुलाई में अपना बजट पेश करेगी। यह पूर्ण बजट पूरे वित्तीय वर्ष के लिए नई सरकार की आर्थिक नीतियों, व्यय और राजस्व योजनाओं का जानकारी देगा। यह नए प्रशासन की प्राथमिकताओं और नीतिगत बदलावों को दर्शाता है।

दो बजट क्यों?

यह दोहरे बजट की प्रथा यह सुनिश्चित करती है कि निवर्तमान सरकार चुनाव से ठीक पहले दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएं या बड़े नीतिगत बदलाव नहीं करती है, जिससे आने वाली सरकार को अपनी वित्तीय रणनीतियों और नीतियों को लागू करने की अनुमति मिलती है। यह दृष्टिकोण भारत में चुनावी वर्षों के दौरान पुराने और नए प्रशासन के बीच परिवर्तन को समायोजित करने के लिए स्टैंडर्ड प्रेक्टिस है।

केंद्रीय बजट 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के अंत तक वैलिड होता है, इसलिए सरकार के पास केवल उस तिथि तक का ही बजट पेश करने का अधिकार होता है। 1 मार्च और नई सरकार के गठन के बीच होने वाले सरकारी व्यय के लिए मौजूदा सरकार को अंतरिम पीरियड में लागत वहन करने के लिए संसद से अनुमति की आवश्यकता होती है, इसलिए अंतरिम बजट जारी किया जाता है।

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